अयोध्या

अयोध्या: सिद्ध योग के शुभ संयोग में गणेश मंदिर के शिखर पर लहराया भगवा ध्वज; अस्थायी स्मारक में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। शनिवार को एक विशेष आध्यात्मिक संयोग ‘सिद्ध योग’ में परिसर के परकोटा स्थित गणेश मंदिर के शिखर पर विधि-विधान से ध्वजारोहण किया गया। वैशाख कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को शाम 5:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 19 फीट ऊंचे दंड पर भगवा ध्वज फहराया गया।

सिद्ध योग में हुआ भव्य ध्वजारोहण

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध योग में किए गए कार्य अत्यंत शुभ और फलदायी होते हैं। इसी पावन मुहूर्त को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट ने ध्वजारोहण का निर्णय लिया।

  • ध्वज का माप: गणेश मंदिर के शिखर पर स्थापित दंड की ऊंचाई 19 फीट 7 इंच है। वहीं, फहराए गए ध्वज की लंबाई 9.3 फीट और चौड़ाई 4.7 फीट है।
  • पारंपरिक पद्धति: खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक और मैनुअल तरीके से संपन्न किया गया।

​ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि यह परकोटा के मंदिरों में ध्वजारोहण की एक शृंखला है। जल्द ही शिव मंदिर, माता भगवती मंदिर और शेषावतार मंदिर के शिखरों पर भी ध्वज फहराए जाएंगे।

अस्थायी स्मारक में अखंड ज्योति का शुभारंभ

​ध्वजारोहण के साथ ही शनिवार को परिसर में एक और महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुआ। रामलला जिस अस्थायी मंदिर (टेंट से निकलकर जहाँ विराजे थे) में लगभग चार वर्षों तक रहे, उसे अब एक अस्थायी स्मारक के रूप में सहेजा गया है।

  • ​शनिवार से यहाँ अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर दी गई है।
  • ​यह स्मारक वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से निर्मित है, जिसका 90% कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • ​यहाँ बिजली के माध्यम से निरंतर ज्योति जलती रहेगी और नित्य पूजा-अर्चना की जाएगी।

गरिमामयी उपस्थिति

​इस ऐतिहासिक अवसर पर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही निर्माण कार्य में जुटी संस्थाओं (L&T और Tata) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स और इंजीनियर्स ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

परकोटा मंदिर: स्थापत्य और आस्था का संगम

​राम मंदिर के चारों ओर बन रहा परकोटा न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें स्थापित किए जा रहे विभिन्न देवताओं के मंदिर परिसर की भव्यता में चार चांद लगा रहे हैं। इस माह के अंत तक सभी निर्धारित मंदिरों के शिखरों पर ध्वज फहराने का लक्ष्य रखा गया है।

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