मुरादाबाद: भाजपा के भीतर टिकट की रस्साकशी ने बढ़ाया सियासी पारा, ठाकुरद्वारा में भारी तनाव
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का ठाकुरद्वारा क्षेत्र इन दिनों सुर्खियों में है। वजह कोई विकास योजना नहीं, बल्कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर चल रही गुटबाजी और वर्चस्व की वह जंग है, जिसने नारायणपुर छंगा गांव में सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव को खतरे में डाल दिया है। बृहस्पतिवार रात हुए पथराव और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को हुई क्षति ने इस विवाद को लखनऊ तक पहुँचा दिया है।
विवाद की जड़: ‘अपनी लकीर लंबी, दूसरे की छोटी’
नारायणपुर छंगा गांव, जो अपनी मिश्रित आबादी और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए जाना जाता था, अचानक राजनीति का अखाड़ा बन गया। सियासी जानकारों का मानना है कि इस गांव में जो कुछ भी हुआ, उसके पीछे भाजपा के दो गुटों के बीच टिकट की दावेदारी का संघर्ष है। ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट कभी पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का अभेद्य किला मानी जाती थी। उनके निधन और उनके परिवार की बदलती राजनीतिक भूमिका के बाद अब यहाँ नए चेहरों के बीच ‘वर्चस्व’ की जंग शुरू हो गई है।
दो गुटों के बीच रस्साकशी का इतिहास
- राजपाल सिंह चौहान गुट: पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह और उनके बेटे अमित चौहान (जो सिंगापुर की बैंक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए हैं) इस क्षेत्र में अपनी जमीन मजबूत कर रहे हैं। 14 अप्रैल को डॉ. आंबेडकर की जयंती के बहाने इन्होंने गांव में सक्रियता बढ़ाई, जिसे प्रतिद्वंद्वी गुट ने अपनी जमीन पर ‘सेंधमारी’ माना।
- अजय प्रताप सिंह गुट: 2022 में भाजपा के उम्मीदवार रहे अजय प्रताप सिंह इसी गांव के निवासी हैं। हालांकि वह चुनाव हार गए थे, लेकिन आगामी चुनाव के लिए वह सबसे प्रबल दावेदार के रूप में सक्रिय हैं।
विवाद तब शुरू हुआ जब अजय प्रताप सिंह के जन्मदिन के दौरान उनके समर्थकों और दूसरे गुट के बीच तनातनी बढ़ गई।
बृहस्पतिवार की रात क्या हुआ?
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 16 अप्रैल की रात अजय प्रताप सिंह के जन्मदिन समारोह में शामिल होने आए लोगों ने अपनी गाड़ियां डॉ. आंबेडकर पार्क के पास खड़ी कर दी थीं। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि सोची-समझी साजिश के तहत पार्क की बिजली काटी गई और प्रतिमा पर पथराव किया गया। इस हिंसक झड़प में प्रकाश वीर, राम सिंह और महिलाओं समेत कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिसिया कार्रवाई और राजनीतिक दबाव
घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। शुरू में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में हिचकिचा रही थी, लेकिन जब भीम आर्मी, सपा, बसपा और आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने गांव का रुख किया और थाने के घेराव की चेतावनी दी, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।
एफआईआर का विवरण:
ठाकुरद्वारा पुलिस ने भाजपा नेता अजय प्रताप सिंह और उनके भाई अभय प्रताप समेत 12 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।
प्रदेश अध्यक्ष का रुख और डैमेज कंट्रोल
विवाद का असर इतना व्यापक था कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को खुद संज्ञान लेना पड़ा। उन्होंने जिला नेतृत्व से रिपोर्ट मांगी और प्रशासन को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। भाजपा के लिए चिंता का विषय यह है कि एक छोटे से गांव में शुरू हुआ यह विवाद दलित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि बिगाड़ सकता है।
निष्कर्ष: 2027 की तैयारी या अपनों से हार?
ठाकुरद्वारा की यह घटना दर्शाती है कि भाजपा के भीतर ‘अपनों’ से मिलने वाली चुनौती कभी-कभी विपक्ष से भी बड़ी हो जाती है। 1000 की आबादी वाले इस गांव के 500 मतदाताओं को साधने की होड़ ने पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।
आगामी विधानसभा चुनाव (2027) से पहले यह ‘टिकट की रस्साकशी’ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। क्या पार्टी इन गुटों को एकजुट कर पाएगी, या फिर यह आंतरिक कलह ठाकुरद्वारा सीट पर विपक्षी दलों के लिए रास्ता साफ कर देगी?