वाराणसी

यूपी की सियासत में उबाल: स्मृति ईरानी ने अखिलेश यादव को दी गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती

​वाराणसी में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन’ कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने विपक्ष पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है, तो वे कन्नौज के बजाय गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं। स्मृति ईरानी के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।

​स्मृति ईरानी का तीखा प्रहार: “विरासत की राजनीति बनाम संघर्ष”

​वाराणसी के चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि जिन नेताओं को राजनीति विरासत में मिली है, वे अक्सर उन महिलाओं के संघर्ष को नहीं समझ पाते जो जमीन से उठकर काम करती हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हमने कांग्रेस अध्यक्ष को उनके ही गढ़ अमेठी में धूल चटाई है, लेकिन अखिलेश यादव में इतना दम नहीं है कि वे अपनी सुरक्षित सीट छोड़ सकें।”

​ईरानी ने स्पष्ट किया कि भाजपा महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने विपक्ष पर दबाव बनाते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को सर्वसम्मति से पास कराया जाना चाहिए, अन्यथा देश की महिलाएं खुद अपना न्याय करेंगी। उन्होंने इसे धमकी नहीं, बल्कि महिलाओं का विनम्र आग्रह बताया।

​नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 33% भागीदारी का संकल्प

​कार्यक्रम के दौरान स्मृति ईरानी ने महिला आरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:

  • राजनीतिक सशक्तिकरण: इस कानून के लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें सुनिश्चित होंगी।
  • निर्णय लेने की भूमिका: महिलाएं अब केवल वोटर नहीं, बल्कि नीति-निर्माता बनेंगी। शिक्षा, रोजगार और राजनीति के हर क्षेत्र में उनका प्रभाव बढ़ेगा।
  • विकसित भारत का सपना: भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लक्ष्य में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।

​डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का संबोधन

​उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने काशी की धरती को नारी शक्ति की उपासना का केंद्र बताया। पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र बिना किसी भेदभाव के लागू किया गया है।

​उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि सरकार ने मुस्लिम बेटियों के हितों की रक्षा के लिए भी कड़े कदम उठाए हैं। डिप्टी सीएम के अनुसार, “विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनें।”

उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से ही बयानों और चुनौतियों के लिए जानी जाती है। 18 अप्रैल 2026 को वाराणसी में स्मृति ईरानी का संबोधन इसी कड़ी का एक नया अध्याय है। लोकसभा चुनावों के बाद और आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच स्मृति का यह बयान केवल एक तंज नहीं, बल्कि भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जहाँ वे विपक्ष को उनके ‘गढ़’ से बाहर निकलने पर मजबूर करना चाहते हैं।

विरासत बनाम मेहनत का मुद्दा:

स्मृति ईरानी ने ‘विरासत’ शब्द का इस्तेमाल कर अखिलेश यादव की राजनीतिक जड़ों पर प्रहार किया है। अमेठी में राहुल गांधी को हराने का उदाहरण देकर उन्होंने खुद को एक ‘फाइटर’ के रूप में पेश किया और अखिलेश यादव को ‘सुरक्षित राजनीति’ करने वाला नेता बताया। यह हमला सीधे तौर पर सपा के कोर वोट बैंक और उनके नेतृत्व क्षमता को चुनौती देने वाला है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का राजनीतिक प्रभाव:

इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ है। भाजपा इस कानून को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। वाराणसी के इस कार्यक्रम के माध्यम से पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जो दल इस बिल का विरोध करेंगे या इसमें अड़ंगा लगाएंगे, वे महिला विरोधी कहलाएंगे। 33% आरक्षण का मुद्दा आधी आबादी को सीधे तौर पर भाजपा से जोड़ने का एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

गोरखपुर ही क्यों?

स्मृति ईरानी ने गोरखपुर का नाम लेकर एक मनोवैज्ञानिक दांव खेला है। गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ है। अखिलेश को वहाँ आमंत्रित करने का मतलब है उन्हें उस पिच पर खेलने के लिए कहना जहाँ भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में है। यह विपक्ष के आत्मविश्वास को परखने की एक कोशिश है।

निष्कर्ष:

वाराणसी का यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी या राजनीतिक सभा नहीं थी, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट भी है। स्मृति ईरानी और ब्रजेश पाठक के बयानों से साफ है कि आगामी समय में ‘महिला सुरक्षा’ और ‘महिला भागीदारी’ यूपी राजनीति के सबसे बड़े मुद्दे होने वाले हैं। अब देखना यह है कि समाजवादी पार्टी इस व्यक्तिगत हमले और राजनीतिक चुनौती का जवाब किस प्रकार देती है।

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