कानपुर

कानपुर: महिला आरक्षण बिल पर छिड़ी ‘जंग’, सपा सांसद के घर भाजपा कार्यकर्ताओं का धावा

कानपुर। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर में शनिवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला मोर्चा की कार्यकर्ता समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश उत्तम पटेल के आवास पर प्रदर्शन करने पहुंच गईं। संसद में महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध की आंच अब सड़कों पर दिखाई दे रही है।

सांसद की नेमप्लेट पर बरसाए जूते-चप्पल

​कानपुर के दामोदर नगर स्थित सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल के आवास का घेराव करते हुए भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि आक्रोशित महिलाओं ने सांसद के मुख्य द्वार पर लगी नेमप्लेट पर जूते-चप्पल बरसाना शुरू कर दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि समाजवादी पार्टी ने संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध कर यह साबित कर दिया है कि वे नारी शक्ति के उत्थान के पक्ष में नहीं हैं।

“महिला विरोधी मानसिकता” का लगाया आरोप

​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष अनीता त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी की मानसिकता हमेशा से महिला विरोधी रही है। उन्होंने कहा, “नरेश उत्तम पटेल और उनकी पार्टी ने संसद में जो किया, वह शर्मनाक है। महिलाओं को उनके हक से वंचित रखने वाली ताकतों को जनता कभी माफ नहीं करेगी। आज का प्रदर्शन केवल एक शुरुआत है।”

​वहीं, राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने भी सपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को नारी शक्ति की प्रगति से डर लगता है। आरक्षण बिल का विरोध करना उनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

संसद से सड़क तक का सफर

​गौरतलब है कि महिला आरक्षण अधिनियम के प्रावधानों और उनकी वोटिंग को लेकर विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। भाजपा का दावा है कि विपक्षी दल इस ऐतिहासिक बिल में बाधा डाल रहे हैं, जबकि सपा जैसे दल इसमें ‘कोटा के भीतर कोटा’ (पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए अलग आरक्षण) की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी राजनीतिक खींचतान ने अब कानपुर में हिंसक प्रदर्शन का रूप ले लिया है।

सुरक्षा व्यवस्था और तनाव

​दामोदर नगर में हुए इस बवाल के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं के उग्र रुख को देखते हुए सपा समर्थकों ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सपा सांसद से माफी की मांग पर अड़ी रहीं।

निष्कर्ष: 2026 की राजनीति और महिला वोट बैंक

​जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ‘नारी शक्ति’ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। कानपुर की यह घटना न केवल स्थानीय विरोध को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आगामी चुनावों में महिला आरक्षण का मुद्दा भाजपा के लिए एक बड़ा चुनावी हथियार बनेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *