वाराणसी: झंडा विवाद ने लिया हिंसक रूप, बेकाबू भीड़ ने एसीपी को किया लहूलुहान; 7 पुलिसकर्मी घायल
वाराणसी। धर्म नगरी वाराणसी का चोलापुर थाना क्षेत्र शनिवार को अखाड़ा बन गया। नेहिया गांव के प्रवेश द्वार पर झंडा लगाने को लेकर दो समुदायों—भीम आर्मी और एक हिंदू संगठन—के बीच शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उसने हिंसक रूप ले लिया। बेकाबू भीड़ ने पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी की, जिसमें एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना समेत सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। माहौल को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं और गांव में भारी संख्या में पीएसी (प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी) तैनात कर दी गई है।
विवाद की जड़: भगवा बनाम नीला झंडा
इस पूरे बवाल की नींव रामनवमी के दिन पड़ी थी, जब नेहिया गांव के प्रवेश द्वार पर भगवा झंडा लगाया गया था। अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) के अवसर पर भीम आर्मी और बसपा समर्थित लोगों ने कथित तौर पर भगवा झंडा हटाकर वहां नीला झंडा लगा दिया।
तनाव तब और बढ़ गया जब 15 अप्रैल की रात शरारती तत्वों ने नीला झंडा हटा दिया। सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल गई कि नीले झंडे को जलाया गया है, जिससे दलित समुदाय के लोग लामबंद हो गए। बृहस्पतिवार को जमकर नारेबाजी और चक्काजाम हुआ। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद दोबारा नीला झंडा लगाया गया।
खूनी संघर्ष और पुलिस पर हमला
नीला झंडा दोबारा लगने से हिंदू वादी संगठन के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने बाबतपुर-चौबेपुर मार्ग को करीब सवा घंटे तक जाम रखा। पुलिस ने दोनों संगठनों के झंडे उतरवाकर माहौल को शांत कराने का प्रयास किया। लेकिन, देर शाम गेट पर फिर से भगवा झंडा लगा दिया गया, जिससे नाराज भीम आर्मी और बसपा समर्थक शनिवार सुबह 11 बजे विरोध प्रदर्शन करने लगे।
जब चोलापुर पुलिस समझाने पहुंची, तो भीड़ उग्र हो गई। बवाल बढ़ता देख चौबेपुर, लालपुर-पांडेयपुर और सारनाथ पुलिस फोर्स बुलाई गई। एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना भीड़ को गांव की तरफ भेजने और समझाने का प्रयास कर रहे थे, तभी भीड़ की तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। एक पत्थर सीधे एसीपी विदुष सक्सेना के माथे पर लगा, जिससे वे लहूलुहान हो गए। साथी पुलिसकर्मियों ने उन्हें संभाला, लेकिन तब तक भीड़ ने अन्य पुलिसकर्मियों को भी पत्थरों से निशाना बनाया और उन्हें जमीन पर गिरा दिया।
ये पुलिसकर्मी हुए घायल
पत्थरबाजी में एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना के अलावा निम्नलिखित पुलिसकर्मी घायल हुए हैं:
- चोलापुर इंस्पेक्टर सधुवन राम गौतम
- गोसाईपुर चौकी इंचार्ज विपिन पांडेय
- हेड कांस्टेबल जगजीवन राम
- कांस्टेबल आदित्य कुमार
- चालक हेड कांस्टेबल मो. शकील अहमद
- पीएसी के हेड कांस्टेबल हरेंद्र राय
नारेबाजी: ‘जय भीम’ बनाम ‘जय भवानी’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह दोनों संगठनों की तरफ से जबरदस्त नारेबाजी हो रही थी। भीम आर्मी की ओर से ‘जय भीम’ तो हिंदू संगठन की ओर से ‘जय भवानी’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए जा रहे थे। पुलिस ने शुरू में दोनों पक्षों को समझाकर माहौल शांत करा दिया था और सभी अपने-अपने घरों को लौट रहे थे, लेकिन अचानक भीड़ में से किसी ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद माहौल बिगड़ता चला गया।
प्रशासनिक कार्रवाई: 61 पर FIR, 4 गिरफ्तार
इस हिंसक घटना के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। गोसाईपुर चौकी इंचार्ज विपिन पांडेय की तहरीर पर 11 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास (बीएनएस की धारा 109), सरकारी कार्यों में बाधा, दंगा, और माहौल बिगाड़ने समेत 12 गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि छह अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। नामजद आरोपियों में नेहिया और आसपास के गांवों के निवासी शामिल हैं।
गांव में पीएसी और पुलिस का फ्लैग मार्च
नेहिया गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। एहतियातन आसपास के 5 थानों की फोर्स और पीएसी की टुकड़ी तैनात कर दी गई है। चोलापुर पुलिस ने नेहिया गांव के प्रवेश द्वार पर सीसी कैमरा लगवा दिया है ताकि गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। पुलिस और पीएसी के जवानों ने सुबह से लेकर शाम तक गांव में फ्लैग मार्च किया।
आरोपियों की पहचान जारी: डीसीपी वरुणा
डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार ने कहा कि माहौल बिगाड़ने वालों और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीडियो फुटेज और सीसी कैमरों के आधार पर अराजकतत्वों की पहचान कराई जा रही है। नेहिया गांव में एहतियातन फोर्स तैनात है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस सतर्क है। एडिशनल सीपी और डीसीपी वरुणा ने भी मौके पर पहुंचकर छानबीन की है।