लखनऊ

अयोध्या: बीमा कंपनी की मनमानी पर लोक अदालत का चाबुक, ट्रक मालिक को ब्याज सहित क्लेम देने का आदेश

बीमा कंपनी का बहाना नहीं आया काम, देना होगा 7% ब्याज

अयोध्या। बीमा कंपनियां अक्सर क्लेम देने के समय तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेती हैं, लेकिन अयोध्या की स्थायी लोक अदालत ने ऐसे ही एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी (Iffco Tokio General Insurance) को आदेश दिया है कि वह याची को दुर्घटनाग्रस्त वाहन की मरम्मत का पूरा खर्च ब्याज सहित भुगतान करे।

क्या था पूरा मामला?

​थाना रौनाही के जगनपुर निवासी अकमल ने अपनी ट्रक का बीमा उक्त कंपनी से कराया था। घटना 13 मई 2017 की है, जब लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र में एक गाय को बचाने के प्रयास में उनका ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया था। वाहन के क्षतिग्रस्त होने के बाद अकमल ने मरम्मत में आए खर्च के लिए बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया।

लाइसेंस का बहाना बनाकर टाला क्लेम

​बीमा कंपनी ने क्लेम देने के बजाय ड्राइवर के लाइसेंस के वैध या अवैध होने का तकनीकी पेंच फंसा दिया और भुगतान करने से मना कर दिया। थक-हारकर अकमल ने 10 जनवरी 2019 को न्याय के लिए स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत का फैसला: ₹4.33 लाख के साथ वाद व्यय भी

​स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष मनोज कुमार तिवारी, सदस्य राजेश कुमार शुक्ला और अजीत प्रताप सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों के सबूतों और दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने बीमा कंपनी को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया:

  • मरम्मत खर्च: ₹4,33,777 (चार लाख तैंतीस हजार सात सौ सतहत्तर रुपये)।
  • ब्याज: वर्ष 2019 से भुगतान की तिथि तक 7% साधारण वार्षिक ब्याज
  • वाद व्यय: मानसिक और कानूनी परेशानी के बदले ₹10,000 अलग से।

वाहन क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें? (उपभोक्ता गाइड)

​यदि आपकी बीमा कंपनी भी क्लेम देने में आनाकानी कर रही है, तो इन कदमों को उठाएं:

  1. लिखित कारण मांगें: कंपनी से हमेशा क्लेम रिजेक्शन का आधिकारिक और लिखित कारण (Repudiation Letter) मांगें।
  2. इंटरनल ओम्बड्समैन: कंपनी के आंतरिक शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer) के पास अपील करें।
  3. बीमा लोक अदालत (Insurance Ombudsman): यदि कंपनी 30 दिनों में समाधान नहीं देती, तो बीमा लोक अदालत में शिकायत दर्ज करें।
  4. स्थायी लोक अदालत/उपभोक्ता फोरम: अयोध्या के इस मामले की तरह आप कानूनी सहारा ले सकते हैं।

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