काशी में ‘अंगारे’ बरसा रहा मौसम: 44.3 डिग्री के साथ देश का 5वां सबसे गर्म शहर बना वाराणसी, जानें कब मिलेगी राहत?
भूमिका
धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी इन दिनों भीषण गर्मी की तपिश से झुलस रही है। अप्रैल के महीने में ही वाराणसी का मिजाज जेठ की दुपहरी जैसा हो गया है। शुक्रवार को वाराणसी ने गर्मी के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि आम जनमानस की भी चिंता बढ़ा दी है। 44.3 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ काशी देश का पांचवा सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया है।
अप्रैल में ही जून जैसा अहसास
आमतौर पर वाराणसी में ऐसी भीषण गर्मी मई के अंत या जून की शुरुआत में देखने को मिलती है, लेकिन इस साल अप्रैल ने ही पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। शुक्रवार को दर्ज किया गया 44.3 डिग्री सेल्सियस तापमान इस साल का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। इससे पहले 20 अप्रैल को पारा 44.2 डिग्री तक पहुंचा था। आंकड़ों पर गौर करें तो यह सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
यूपी का दूसरा सबसे गर्म शहर
वाराणसी न केवल देश के टॉप 5 गर्म शहरों में शामिल हुआ, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी यह दूसरे स्थान पर रहा। दिन भर चली 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली गर्म हवाओं ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया। दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे के बीच ‘लू’ (Heatwave) का असर सबसे ज्यादा देखा गया। हवा में नमी का स्तर गिरकर 30 फीसदी पर आ गया है, जिससे त्वचा झुलसाने वाली गर्मी महसूस हो रही है।
मौसम वैज्ञानिक की राय: क्यों बढ़ रही है गर्मी?
यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, इस भीषण गर्मी के पीछे मुख्य कारण हवा की गति में आई कमी और महाराष्ट्र के आसपास बना प्रतिचक्रवात (Anticyclone) है। इस प्रतिचक्रवात के प्रभाव से गर्म हवाएं सीधे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को प्रभावित कर रही हैं, जिससे तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
अगले 3 दिनों का हाल: क्या बारिश दिलाएगी राहत?
भीषण गर्मी के बीच राहत की एक मध्यम किरण भी दिखाई दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार:
- पश्चिमी विक्षोभ का असर: एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका प्रभाव 26 अप्रैल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिखेगा। धीरे-धीरे इसका असर पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) तक पहुँचने की संभावना है।
- तापमान में गिरावट: 26 और 27 अप्रैल को वाराणसी और आसपास के इलाकों में बादलों की आवाजाही रह सकती है। इससे अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की उम्मीद है।
- बारिश की संभावना: 27 अप्रैल के बाद पूर्वी यूपी के जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी का पूर्वानुमान जताया गया है। यह सिलसिला अगले तीन-चार दिनों तक रुक-रुक कर चल सकता है।
पिछले साल (2025) से तुलना
यदि हम पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति इस बार कहीं ज्यादा गंभीर है। 24 अप्रैल 2025 को वाराणसी का अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री था, जबकि इस साल यह 44.3 डिग्री को पार कर गया है। यानी पिछले साल की तुलना में पारा लगभग 2 डिग्री ज्यादा है और लू के थपेड़े भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आक्रामक हैं।
स्वास्थ्य संबंधी सावधानी और सुझाव
इस भीषण गर्मी और लू को देखते हुए डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
- हाइड्रेशन: दिन भर में कम से कम 4-5 लीटर पानी पिएं। ओआरएस (ORS), नींबू पानी और नारियल पानी का सेवन करें।
- दोपहर में बाहर निकलने से बचें: बहुत जरूरी न हो तो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में जाने से बचें।
- सुरक्षा के उपाय: बाहर निकलते समय सूती कपड़ों का प्रयोग करें, सिर को दुपट्टे या टोपी से ढंकें और धूप के चश्मे (Sunglasses) का इस्तेमाल करें।
- खान-पान: हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे मौसमी फलों को डाइट में शामिल करें।
निष्कर्ष
वाराणसी में फिलहाल गर्मी से तुरंत पूरी तरह राहत मिलने के आसार कम हैं। हालांकि, आगामी पश्चिमी विक्षोभ और संभावित बारिश से पारा कुछ डिग्री नीचे जरूर आएगा, लेकिन मानसून आने तक लू का प्रकोप बीच-बीच में परेशान करता रहेगा। काशीवासियों के लिए फिलहाल बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।