वाराणसी में बरसे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री: बोले- “बाबा विश्वनाथ के बगल से जल्द हटेगा कलंक, लहराएगा भगवा”
वाराणसी। धर्म नगरी काशी में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बार फिर रौद्र और स्पष्ट रूप देखने को मिला। रविवार को वाराणसी पहुंचे पंडित शास्त्री ने ज्ञानवापी परिसर, हिंदू राष्ट्र और सामाजिक समरसता को लेकर कई बड़े और कड़े बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप जो ‘कलंक’ लगा है, वह जल्द ही मिटेगा और वहां भव्य अभिषेक के साथ भगवा लहराएगा।
ज्ञानवापी पर दिया बड़ा बयान
एक निजी शोरूम के उद्घाटन के सिलसिले में रथयात्रा क्षेत्र पहुंचे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया और भक्तों को संबोधित करते हुए ज्ञानवापी मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “बाबा विश्वनाथ के बगल में जो कलंक लगा है, वह अब अधिक दिनों का मेहमान नहीं है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि न्यायालय जल्द ही सत्य के पक्ष में फैसला सुनाएगा। वह दिन दूर नहीं जब बाबा विश्वनाथ की कृपा से वहीं पर भव्य जलाभिषेक होगा और सनातन का प्रतीक भगवा ध्वज शान से लहराएगा।”
पंडित शास्त्री ने काशी की उदारता का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ हिंदू और मुसलमान दोनों वर्षों से साथ रह रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि काशी में जितना लाभ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग (दुकानदार) लेते हैं, उतना शायद कहीं और नहीं मिलता। उन्होंने इसे हिंदुओं की सहिष्णुता और उदारता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
हिंदू राष्ट्र की पुरजोर मांग
अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की अपनी प्रतिज्ञा को दोहराया। उन्होंने वैश्विक उदाहरण देते हुए कहा:
”जब दुनिया में मुसलमानों के 65 से ज्यादा देश हो सकते हैं, ईसाइयों के 95 से ज्यादा देश हैं और यहूदियों का अपना देश है, तो फिर करोड़ों हिंदुओं के लिए एक हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हो सकता?”
उन्होंने भीड़ से आह्वान किया कि यदि भारत को बचाना है, तो इसे हिंदू राष्ट्र बनाना ही एकमात्र उपाय है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी को देश से निकालना नहीं है। उन्होंने कहा, “हिंदू राष्ट्र में सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग रहेंगे, किसी को भारत छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। बस एक ही शर्त है—कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।”
“वास्तविक बनो, बाबाओं के पीछे मत भागो”
भीड़ को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने एक गहरी आध्यात्मिक बात भी कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे न तो पूरी तरह नास्तिक बनें और न ही केवल दिखावे के लिए आस्तिक। उन्होंने कहा, “न नास्तिक बनो, न आस्तिक बनो; यदि बनना है तो ‘वास्तविक’ बनो। जिस दिन आप वास्तविक बन जाएंगे, उस दिन आपको न तो किसी बाबा के पीछे भागना पड़ेगा और न ही मेरे पीछे चक्कर काटने पड़ेंगे। जो व्यक्ति भीतर से सच्चा हो जाता है, उस पर बालाजी की कृपा स्वतः ही बरसने लगती है।”
भक्तों का उमड़ा सैलाब
पंडित शास्त्री का वाराणसी आगमन किसी उत्सव से कम नहीं था। बाबतपुर एयरपोर्ट से लेकर रथयात्रा तक उनके आठ वाहनों के काफिले का भव्य स्वागत हुआ। जैसे ही उन्होंने अपनी कार का सन-रूफ खोला, हजारों की संख्या में मौजूद प्रशंसकों ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के नारों से आसमान गुंजा दिया। भीड़ इतनी अधिक थी कि सुरक्षाकर्मियों को व्यवस्था संभालने में काफी पसीना बहाना पड़ा।
शास्त्री जी ने दूर खड़ी महिलाओं और बुजुर्गों से भी संवाद किया और उनसे अपील की कि वे भीड़ में आगे न आएं, बल्कि वहीं से आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्होंने लोगों के सुखद भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे बालाजी से प्रार्थना करेंगे कि किसी के साथ कोई अनहोनी न हो।
निष्कर्ष
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह दौरा एक बार फिर से ज्ञानवापी और हिंदू राष्ट्र की चर्चाओं को तेज कर गया है। उनके बयानों ने जहां उनके समर्थकों में उत्साह भर दिया है, वहीं यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने एजेंडे और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को लेकर कितनी मजबूती से खड़े हैं। काशी की धरती से दिया गया उनका ‘वास्तविक’ बनने का संदेश भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।