आखिर भट्ठी बना यूपी का बांदा जिला?: घटती हरियाली, सूखती नदियां व खनन ने बढ़ाई तपिश, अभी और खराब होंगे हालात
उत्तर प्रदेश का Banda इन दिनों “भट्ठी” बन चुका है। यहां तापमान 48°C के पार पहुंच गया और कई बार यह देश का सबसे गर्म जिला रिकॉर्ड हुआ।
इसके पीछे सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि कई पर्यावरणीय कारण एक साथ काम कर रहे हैं:घटती हरियाली: बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले वर्षों में पेड़ों और जंगलों की संख्या कम हुई है। हरियाली कम होने से जमीन ज्यादा गर्म होती है और “हीट आइलैंड” जैसा असर पैदा होता है।
सूखती नदियां और जलस्रोत: केन और आसपास की छोटी नदियों में जलस्तर घटने से वातावरण में नमी कम हो रही है। सूखी जमीन तेजी से तपती है।
खनन का असर: पत्थर और बालू खनन ने इलाके की प्राकृतिक सतह को नुकसान पहुंचाया है। बड़े पैमाने पर खुली चट्टानें और बंजर जमीन गर्मी को ज्यादा सोखती हैं।
पथरीली और सूखी भूमि: बुंदेलखंड का भूभाग पहले से ही शुष्क और चट्टानी है, इसलिए यहां गर्म हवाएं ज्यादा असर करती हैं।
जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो: विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से 3-5°C अधिक तापमान के पीछे क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो भी बड़ी वजह हैं।
हालात इतने खराब हैं कि रिपोर्टों के मुताबिक बांदा में सुबह 10 बजे के बाद सड़कें लगभग खाली हो जाती हैं और लोग कामकाज जल्दी निपटा रहे हैं।मौसम विभाग ने बुंदेलखंड समेत यूपी के कई जिलों में अभी भी लू और प्रचंड गर्मी का अलर्ट जारी किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल संरक्षण, वृक्षारोपण और अनियंत्रित खनन पर रोक जैसे कदम नहीं उठे, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
