UP: महंगा हुआ सोना, फिर भी नहीं टूटा यूपी वालों का मोह, हर साल 100 टन बनी रहती है सोने की मांग
सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं, लेकिन इसके बावजूद यूपी समेत पूरे भारत में लोगों का गोल्ड के प्रति आकर्षण कम नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700-800 टन सोने की मांग बनी रहती है, जिसमें यूपी जैसे बड़े राज्यों की हिस्सेदारी काफी अहम मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह, त्योहार और पारिवारिक परंपराओं के कारण लोग महंगे दाम होने के बावजूद खरीदारी जारी रखते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो सोना “मुश्किल समय की बचत” के रूप में भी देखा जाता है।
12026 की पहली तिमाही में भारत की कुल गोल्ड डिमांड 151 टन रही, जो पिछले साल की तुलना में 10% ज्यादा है। खास बात यह रही कि पहली बार निवेश के लिए खरीदा गया सोना, ज्वेलरी की मांग से आगे निकल गया। निवेश मांग 82 टन पहुंची जबकि ज्वेलरी मांग 66 टन रही।
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के अनुसार, सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद लोग इसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगाई की चिंता के चलते गोल्ड ETF, सिक्कों और बार में निवेश तेजी से बढ़ा है।
हालांकि, लगातार बढ़ती कीमतों का असर यह जरूर हुआ है कि लोग अब हल्के वजन के गहने, 18 या 22 कैरेट विकल्प और एक्सचेंज स्कीम की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं।
फिर भी मांग में बड़ी गिरावट नहीं दिख रही। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में सोने की कीमतों में 443% तक वृद्धि हुई, लेकिन भारत की वार्षिक मांग लगभग स्थिर बनी रही।
