लखनऊ

UP: गाजीपुर कांड पर गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा; महिलाओं की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक नाबालिग लड़की की दुखद मौत के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और प्रदेश में कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

गाजीपुर कांड और सपा की आर्थिक मदद

​राजधानी लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने गाजीपुर की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और सरकार इसे नियंत्रित करने में विफल रही है। अखिलेश ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और पार्टी की ओर से परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

​सपा अध्यक्ष ने कहा, “जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं या प्रशासन संवेदनहीन हो जाए, तो जनता न्याय के लिए कहां जाएगी? गाजीपुर की घटना उत्तर प्रदेश की वर्तमान कानून व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर पेश करती है।”

महिला आरक्षण पर केंद्र को घेरा

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने राजनीति में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है, लेकिन केंद्र सरकार इसे लागू करने में टालमटोल कर रही है।

​अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा केवल विज्ञापन और नारों की सरकार है। अगर मोदी सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो इसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया जा रहा? हकीकत तो यह है कि भाजपा खुद महिलाओं को उनका हक और आरक्षण नहीं देना चाहती।”

ओम प्रकाश राजभर का पलटवार

​दूसरी ओर, यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के नेता केवल माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने गाजीपुर में केवल 15 लोगों को जाने की अनुमति दी थी, लेकिन सपा के 250 से अधिक कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। यह संवेदनशीलता नहीं, बल्कि राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश है।”

विपक्ष का बढ़ता दबाव: कांग्रेस भी मैदान में

​गाजीपुर मामले को लेकर केवल समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी सक्रिय नजर आ रही है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल भी जल्द ही गाजीपुर का दौरा करेगा। यह टीम जमीनी हकीकत की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी।

कानून व्यवस्था पर उठते सवाल

​गाजीपुर की घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात तो करती है, लेकिन धरातल पर अपराधी बेखौफ हैं। वहीं, सत्ता पक्ष का दावा है कि पुलिस अपना काम मुस्तैदी से कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष

​गाजीपुर कांड के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल है। एक ओर जहां अखिलेश यादव इसे सरकार की विफलता बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे विपक्ष का चुनावी स्टंट करार दे रहा है। इन सबके बीच, जनता और पीड़ित परिवार की नज़रें केवल इस बात पर टिकी हैं कि उन्हें इंसाफ कब और कैसे मिलेगा।

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