प्रयागराज

UP News: जमानत आदेशों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त निर्देश, अब जजों को देना होगा आरोपी के ‘क्राइम रिकॉर्ड’ का पूरा ब्योरा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि अब से राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों (सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और विशेष न्यायाधीश) को किसी भी जमानत आदेश (Bail Order) को पारित करते समय आरोपी के आपराधिक इतिहास (Criminal History) का पूरा विवरण एक स्पष्ट तालिका (Table) के रूप में देना अनिवार्य होगा।

​क्यों पड़ी इस आदेश की जरूरत?

​न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश नफीस उर्फ मोहम्मद नफीस की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी ने अदालत में झूठा हलफनामा दिया था। आरोपी ने दावा किया था कि उसके खिलाफ कोई केस लंबित नहीं है, जबकि जांच में पाया गया कि उसके विरुद्ध पहले से ही पाँच आपराधिक मामले दर्ज थे।

​अदालत ने इस विसंगति को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​’इलाहाबाद हाईकोर्ट (संशोधन) नियम-2025′ का कड़ाई से पालन

​कोर्ट ने आदेश दिया है कि नए नियमों के तहत अब प्रत्येक आरोपी को जमानत आवेदन के साथ अपने विरुद्ध लंबित सभी मामलों और पुराने अदालती फैसलों का विवरण देना होगा। कोर्ट ने अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है:

  • सरकारी वकील और जांच अधिकारी: इनका यह कर्तव्य होगा कि वे सुनवाई के दौरान आरोपी का सटीक और पूरा आपराधिक इतिहास कोर्ट के सामने रखें।
  • प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी: यदि अभियोजन पक्ष सही तथ्य रिकॉर्ड पर लाने में विफल रहता है, तो हाईकोर्ट उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को मामला भेज सकता है।

​मामला क्या था?

​बस्ती जिले के परसरामपुर थाने में नफीस नामक व्यक्ति पर एक महिला के साथ मारपीट का आरोप था, जिससे महिला का गर्भपात हो गया था। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में कोई बाहरी चोट नहीं मिली थी और बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी को महिला की गर्भावस्था की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने मामले की मेरिट और जेल में बिताई गई अवधि को देखते हुए उसे जमानत दे दी, लेकिन साथ ही भविष्य के लिए यह सख्त गाइडलाइन जारी कर दी।

​पूरे प्रदेश में लागू होगा आदेश

​हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देशित किया है कि इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजी जाए। इसका उद्देश्य पूरे राज्य में जमानत की प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है, ताकि कोई भी अपराधी अपना इतिहास छिपाकर जमानत न पा सके।

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