लखनऊ

बाराबंकी: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर काल बनी रफ्तार, बस के नीचे घुसी डीसीएम; चालक की दर्दनाक मौत

बाराबंकी: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर काल बनी रफ्तार, बस के नीचे घुसी डीसीएम; चालक की दर्दनाक मौत
​बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ रविवार की देर रात लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। यहाँ खराब होकर सड़क किनारे खड़ी एक निजी बस में पीछे से आ रही तेज रफ्तार डीसीएम (DCM) ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बस के नीचे खराबी देख रहे चालक की कुचलकर मौत हो गई, जबकि खलासी और डीसीएम चालक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
​कैसे हुआ हादसा?
​प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 12 बजे एक निजी बस यात्रियों को लेकर जा रही थी। सफदरगंज थाना क्षेत्र के रसौली के पास पहुँचते ही बस में कुछ तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण चालक ने बस को किनारे खड़ा कर दिया। बस चालक अमित कुमार (35 वर्ष) यह पता लगाने के लिए कि बस में क्या दिक्कत है, गाड़ी के नीचे जाकर उसे ठीक करने की कोशिश कर रहे थे।
​इसी दौरान, अयोध्या (फैजाबाद) की ओर से पानी की बोतलों से लदी एक तेज रफ्तार डीसीएम आई और सीधे खड़ी बस के पिछले हिस्से में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और नीचे काम कर रहे अमित कुमार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अमित की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
​मच गई चीख-पुकार
​आधी रात को हुए इस धमाके जैसी टक्कर से बस के भीतर सो रहे यात्रियों में अफरातफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय राहगीरों और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद सफदरगंज थाना प्रभारी अमर कुमार चौरसिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे।
​पुलिस की कार्रवाई और राहत कार्य
​पुलिस ने क्रेन और स्थानीय लोगों की मदद से बस के नीचे फंसे चालक के शव को बाहर निकाला। हादसे में घायल हुए बस के परिचालक (खलासी) और डीसीएम चालक को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने घटनास्थल से दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाकर हाईवे पर यातायात सुचारू कराया ताकि अन्य कोई दुर्घटना न हो।
​कोतवाली प्रभारी ने बताया कि मृतक चालक अमित कुमार के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है कि क्या डीसीएम चालक को नींद आ गई थी या धुंध/तेज रफ्तार की वजह से वह बस को देख नहीं पाया।
​सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
​यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। अक्सर देखा जाता है कि रात के समय हाईवे पर खराब हुए वाहनों को बिना किसी ‘रिफ्लेक्टर’ या ‘खतरे के संकेत’ (Warning Sign) के खड़ा कर दिया जाता है। ऐसे में पीछे से आने वाले वाहनों को यह अंदाजा नहीं लग पाता कि आगे कोई गाड़ी स्थिर खड़ी है।
​विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हाईवे पर गाड़ी खराब हो, तो कम से कम 50-100 मीटर पहले रिफ्लेक्टर जैकेट या पत्थर/झाड़ियां रखकर संकेत देना अनिवार्य है। बाराबंकी का यह हादसा उन हजारों लोगों के लिए एक सबक है जो रात के समय हाईवे पर सफर करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *