गोरखपुर: जमानत मिलते ही फिर ‘साहब’ बना फर्जी IPS, उधारी के पैसे मांगने पर मार्ट मैनेजर को दी जेल भेजने की धमकी
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खाकी वर्दी का रौब दिखाकर लोगों को ठगने वाला ‘फर्जी आईपीएस’ शनि शर्मा जेल से जमानत पर बाहर आते ही एक बार फिर अपनी पुरानी फितरत पर उतर आया है। आरोप है कि बाहर निकलते ही उसने उन लोगों को धमकाना शुरू कर दिया है, जिनसे उसने ठगी की थी या जिनसे उधार सामान लिया था। ताजा मामला पीपीगंज थाना क्षेत्र का है, जहां एक मार्ट प्रबंधक ने आरोपी के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है।
क्या है नया विवाद?
पीपीगंज कस्बे के एक मार्ट प्रबंधक जितेंद्र कुमार मिश्रा ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि जनवरी माह में शनि शर्मा ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर उनसे जान-पहचान बढ़ाई थी। इस रसूख का फायदा उठाकर उसने मार्ट से करीब 19 हजार रुपये का सामान उधार लिया। जब जितेंद्र ने अपने पैसे मांगे, तो आरोपी टालमटोल करने लगा।
इसी बीच, फरवरी में पुलिस ने शनि शर्मा को एक अस्पताल संचालक से रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। करीब एक सप्ताह पहले वह जमानत पर बाहर आया और बुधवार को उसने फिर से मार्ट मैनेजर से संपर्क कर घर का सामान भेजने को कहा। जब प्रबंधक ने पुराना बकाया मांगा, तो ‘फर्जी आईपीएस’ ने अपना असली रंग दिखाया और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी दे डाली।
वर्दी वाली फोटो दिखाकर करता था वसूली
शनि शर्मा का तरीका बेहद शातिर था। वह पुलिस की वर्दी पहनकर फोटो खिंचवाता और उन्हें व्हाट्सएप पर स्टेटस लगाकर या लोगों को भेजकर अपना खौफ पैदा करता था। पीपीगंज के कई चिकित्सकों, कपड़ा व्यापारियों और दवा विक्रेताओं से वह इसी तरह महंगी दवाएं और सामान वसूल चुका है। सोशल मीडिया पर उसका वर्दी वाला वीडियो वायरल होने के बाद ही पुलिस ने उस पर शिकंजा कसा था।
जमानत के बाद क्षेत्र में दहशत
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि शनि शर्मा के जेल से बाहर आने के बाद क्षेत्र में डर का माहौल है। आरोपी न केवल व्यापारियों को धमका रहा है, बल्कि चर्चा है कि वह अपनी पहली पत्नी को भी जेल जाने का जिम्मेदार मानते हुए धमकियां दे रहा है। लोग उसके रसूख और फर्जीवाड़े के डर से खुलकर सामने आने में कतरा रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई
पीपीगंज थाना प्रभारी अरुण सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि शिकायती पत्र के आधार पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यदि आरोपी द्वारा दोबारा डराने-धमकाने या फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो उसकी जमानत निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय टिप्पणी: यह घटना पुलिस प्रशासन के लिए भी एक चुनौती है कि कैसे एक आदतन अपराधी जेल से छूटते ही दोबारा समाज में अराजकता फैलाने लगता है। व्यापारियों को सुरक्षा का अहसास कराना अब स्थानीय पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए।