लखनऊ

गोरखपुर: गैस किल्लत से निपटने के लिए ‘डीजल भट्ठी’ बना नया हथियार, रेस्टोरेंट संचालकों की पहली पसंद

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में इन दिनों कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत और उनकी आसमान छूती कीमतों ने छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट संचालकों की कमर तोड़ दी है। इस संकट के बीच, शहर के व्यापारियों ने एक पुराना लेकिन प्रभावी विकल्प ढूंढ निकाला है— डीजल भट्ठी। समय पर सिलिंडर न मिलने की समस्या से तंग आकर अब रेस्टोरेंट में खाना बनाने के लिए डीजल भट्ठियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

​मांग में भारी उछाल: कारीगरों के पास ऑर्डर्स की बाढ़

​लाल डिग्गी क्षेत्र के प्रसिद्ध डीजल भट्ठी कारीगर राजा के अनुसार, पिछले एक महीने में डीजल भट्ठियों की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने बताया कि अकेले उनकी दुकान पर एक महीने के भीतर 25 से ज्यादा ऑर्डर मिल चुके हैं। आलम यह है कि एक भट्ठी को तैयार करने में 5 से 6 दिन का समय लग रहा है और कारीगर दिन-रात काम में जुटे हैं।

​कितनी आती है लागत?

​एक मानक डीजल भट्ठी को तैयार करने में लगभग 30,000 से 35,000 रुपये तक का खर्च आ रहा है। इसके मुख्य हिस्सों की बात करें तो इसमें शामिल हैं:

  • बर्नर: इसे खास तौर पर दिल्ली और पंजाब से मंगवाया जा रहा है।
  • मोटर और कंट्रोलर: भट्ठी की आंच को नियंत्रित करने के लिए महंगे और टिकाऊ मोटर का उपयोग किया जा रहा है।
  • लोहे का ढांचा: स्थानीय स्तर पर मजबूती से तैयार किया जाता है।

​रेस्टोरेंट संचालकों ने क्यों चुना यह विकल्प?

​नौका विहार और इंदिरा नगर जैसे प्रमुख इलाकों के रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस सिलिंडर की निर्भरता उनके व्यापार को नुकसान पहुँचा रही थी।

​”गैस उपलब्ध न होने से हमारा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। बार-बार गैस के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे। अब डीजल भट्ठी पर पूरा खाना तैयार होगा, जिससे समय की बचत होगी और काम बिना रुकावट चलेगा।”

लाल बाबू, रेस्टोरेंट संचालक (इंदिरा नगर)

​वहीं नौका विहार के पास रेस्टोरेंट चलाने वाले अविनाश ने बताया कि गैस की भारी किल्लत के कारण उन्हें कुछ दिनों के लिए अपना रेस्टोरेंट बंद तक करना पड़ा था। अब उन्होंने डीजल भट्ठी का सहारा लिया है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न आए।

​डीजल भट्ठी के फायदे और चुनौतियां

​जहाँ एक ओर डीजल भट्ठी गैस के मुकाबले अधिक किफायती और सुलभ लग रही है, वहीं इसके अपने फायदे और नुकसान भी हैं:

विशेषताविवरण
किफायतीलंबी अवधि में गैस के मुकाबले कम खर्च आता है।
सुलभताडीजल आसानी से पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है, सिलिंडर की तरह बुकिंग का इंतजार नहीं करना पड़ता।
चुनौतीडीजल भट्ठी से निकलने वाला धुआं और गर्मी पर्यावरण और रसोइयों के लिए थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

निष्कर्ष

​गोरखपुर में डीजल भट्ठी का बढ़ता चलन इस बात का संकेत है कि जब संसाधनों की कमी होती है, तो स्थानीय जुगाड़ और तकनीक ही व्यापार को सहारा देती है। हालांकि, प्रशासन को कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति सुचारू करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके।

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