High Court : बस्ती के एसपी बताएं- मजिस्ट्रेट को अग्रिम जमानत का अधिकार कब से मिला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए बस्ती जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) से सवाल किया है कि आखिर मजिस्ट्रेट को अग्रिम जमानत (anticipatory bail) देने का अधिकार कब से मिल गया।
क्या है पूरा मामला?
अदालत के सामने एक ऐसा मामला आया, जिसमें आरोप था कि निचली अदालत (मजिस्ट्रेट) ने आरोपी को अग्रिम जमानत जैसी राहत दे दी, जबकि कानून के अनुसार यह अधिकार मजिस्ट्रेट के पास नहीं होता। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:अग्रिम जमानत देने का अधिकार केवल सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट को होता है।मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसी राहत देना कानून के दायरे से बाहर है।इस तरह का आदेश न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
एसपी से जवाब तलबकोर्ट ने बस्ती के एसपी से पूछा:पुलिस ने ऐसे आदेश पर क्या कार्रवाई की?क्या उन्हें कानून की सही जानकारी है?ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका क्या रहे |
क्यों है मामला महत्वपूर्ण?
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि:यह न्यायिक अधिकारों की सीमाओं को स्पष्ट करता हैनिचली अदालतों और पुलिस प्रशासन दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है
भविष्य में ऐसे आदेशों को लेकर एक स्पष्ट संदेश देता हैकानूनी स्थिति (सरल भाषा में)भारतीय कानून के तहत:अग्रिम जमानत (CrPC की धारा 438) केवल सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट ही दे सकते हैंमजिस्ट्रेट सिर्फ नियमित जमानत (regular bail) पर सुनवाई करते हैं
