कानपुर किडनी कांड: प्रयागराज से वाराणसी तक फैला ‘मौत का नेटवर्क’, लीक ऑडियो ने खोली खौफनाक हकीकत
कानपुर: उत्तर प्रदेश का बहुचर्चित ‘कानपुर किडनी कांड’ अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहाँ मानवीय संवेदनाएं तार-तार होती नजर आ रही हैं। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस रैकेट की जड़ें कानपुर से निकलकर प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ और दिल्ली तक फैली पाई जा रही हैं। हाल ही में मुख्य आरोपी शिवम अग्रवाल और प्रयागराज के नवीन पांडेय के बीच हुई बातचीत का एक ऑडियो लीक हुआ है, जिसने इस काले कारोबार के पीछे छिपी क्रूरता को बेनकाब कर दिया है।
एम्बुलेंस की जगह बोलेरो: एक महिला की दर्दनाक मौत
जांच के दौरान पुलिस को शिवम अग्रवाल के मोबाइल से कुछ ऐसी रिकॉर्डिंग मिली हैं, जो रूह कंपा देने वाली हैं। ऑडियो से खुलासा हुआ है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद एक महिला की हालत बिगड़ गई थी। उसे दिल्ली के द्वारका स्थित एक बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया जाना था। कायदे से उसे जीवन रक्षक उपकरणों से लैस एम्बुलेंस में भेजा जाना चाहिए था, लेकिन आरोपियों ने खर्च बचाने के लिए उसे एक सामान्य बोलेरो गाड़ी में भेज दिया।
रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। ऑडियो में नवीन पांडेय शिवम को बता रहा है कि महिला की मौत हो गई है और घरवाले हंगामा कर रहे हैं। इस पर शिवम बड़ी ही संवेदनहीनता के साथ जवाब देता है कि “डॉ. रोहित से कहो कि परिजनों को मैनेज करें।” यह बातचीत दर्शाती है कि इन शिकारियों के लिए इंसानी जान की कोई कीमत नहीं थी।
किडनी का ‘अवैध बाजार’: 24 लाख में सौदा
दूसरी लीक हुई रिकॉर्डिंग में इस धंधे में होने वाली ‘अवैध सौदेबाजी’ का जिक्र है। नवीन, शिवम को बताता है कि साहिल नाम के एक युवक ने शिवम के नाम का इस्तेमाल कर 24 लाख रुपये में किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा किया है। नवीन कहता है कि ग्राहक (पार्टी) का कहना था कि शिवम अग्रवाल तो 40 लाख रुपये मांगते हैं, जबकि साहिल आधे रेट में काम करने को तैयार हो गया।
यह सुनकर शिवम भड़क जाता है और धमकी भरे लहजे में कहता है कि साहिल शायद डॉ. रोहित और उसे जानता नहीं है, उसके लिए ऐसा करना ठीक नहीं होगा। इससे साफ है कि इस नेटवर्क में रेट कार्ड फिक्स था और इनके बीच आपसी प्रतिस्पर्धा भी चल रही थी।
प्रयागराज और वाराणसी तक फैला नेटवर्क
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के इस खेल के तार बहुत गहरे हैं। पुलिस को प्रयागराज के एक नर्सिंग होम में काम करने वाले नवीन पांडेय की पुख्ता जानकारी मिली है। नवीन पिछले 4-5 साल से इस गिरोह के मास्टरमाइंड डॉ. रोहित के संपर्क में था। पुलिस की टीमें अब नवीन की तलाश में प्रयागराज और वाराणसी में छापेमारी कर रही हैं।
इसके अलावा, चित्रकूट में एक टेक्नीशियन की लोकेशन मिली है, जो पहले कानपुर के एक नर्सिंग होम में काम करता था। पुलिस की एक टीम चित्रकूट के लिए भी रवाना कर दी गई है।
आहूजा हॉस्पिटल और जांच का दायरा
कानपुर का आहूजा हॉस्पिटल इस पूरे कांड के केंद्र में है। शिवम अग्रवाल इसी अस्पताल का स्टाफ था और यहीं से वह मरीजों और डोनर्स को फंसाने का जाल बुनता था। पुलिस ने शिवम की पत्नी से भी पूछताछ की है, जिसने स्वीकार किया है कि उसका पति पिछले एक साल से डॉ. रोहित के संपर्क में था, जबकि नवीन पांडेय काफी पुराना खिलाड़ी है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने भी इस मामले में प्रभावित हुए मरीजों की जांच की है, जिससे मेडिकल लापरवाही और अवैध सर्जरी की पुष्टि हो रही है।
निष्कर्ष: प्रशासन की सख्ती
कानपुर पुलिस इस ‘डेथ नेटवर्क’ को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी है। आरोपियों के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स से कई बड़े नामों के खुलासे होने की उम्मीद है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैसे चंद रुपयों के लिए ‘जीवन देने वाले’ डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी ‘जान लेने वाले’ बन गए।