कानपुर का प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग गहरे संकट में: कच्चे माल की कीमतें 40% तक बढ़ीं, एक शिफ्ट बंद; 250 इकाइयां तालाबंदी की कगार पर
कानपुर: औद्योगिक नगरी कानपुर का प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग इस समय अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संभावित युद्ध के भय ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। कानपुर में प्रिंटिंग-पैकेजिंग से संबंधित विभिन्न कच्चे माल के दामों में 10% से 40% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यहाँ की 250 से अधिक इकाइयों पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है।
संकट की गंभीरता: एक शिफ्ट बंद, उत्पादन 50% पर
कानपुर शहर में प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग 5000 से 8000 लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है। यह उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विभिन्न उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री और प्रिंटिंग सेवाएं प्रदान करता है। हालांकि, मौजूदा हालात में अधिकांश इकाइयों ने पहले ही अपनी एक शिफ्ट बंद कर दी है, जिससे उत्पादन क्षमता 50% तक गिर गई है।
कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और उद्यमियों की हाल ही में उद्योग कुंज स्थित कार्यालय पर एक बैठक हुई, जहाँ इस गंभीर स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। एसोसिएशन ने अन्य उद्योगों से सहयोग की अपील की है, ताकि यह उद्योग पूरी तरह से ठप होने से बच सके।
किन-किन कच्चे मालों पर पड़ा असर?
उद्यमियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है:
- डुप्लेक्स एवं अन्य पेपर बोर्ड: 10-12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
- लैमिनेशन फिल्म्स: 35-40 प्रतिशत तक की रिकॉर्ड वृद्धि
- क्राफ्ट पेपर और प्रिंटिंग इंक: 10-12 प्रतिशत तक की तेजी
- एडहेसिव्स (चिपकाने वाले पदार्थ) और विशेष उपभोग्य सामग्री: 30-35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
लागत में इस अप्रत्याशित वृद्धि ने उद्योग चलाना बेहद मुश्किल बना दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश अवस्थी ने कहा, “लागत में लगातार वृद्धि के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सहयोग मांगा गया है। लागत मूल्य बढ़ने के अनुपात में उत्पादों के दाम बढ़ाने के लिए कहा गया है, ताकि उद्योग चल सकें।”
तालाबंदी का खतरा और रोजगार पर असर
कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश बरासिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “कच्चे माल की उपलब्धता भी कम हो गई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। अगर लागत मूल्य के अनुपात में उत्पादों के दाम नहीं बढ़ाए गए, तो शहर की 250 से अधिक प्रिंटिंग-पैकेजिंग इकाइयों को पूरी तरह से बंद करने की नौबत आ सकती है।”
यदि ऐसा होता है, तो हजारों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे कानपुर में बेरोजगारी का संकट गहरा सकता है। उद्यमियों ने ग्राहकों और कच्चा माल आपूर्तिकर्ताओं से अपील की है कि वे वर्तमान परिस्थितियों की गंभीरता को समझें। उन्होंने ग्राहकों से बढ़ी हुई लागत के आधार पर मूल्य बढ़ाने और कच्चा माल आपूर्तिकर्ताओं से दाम न बढ़ाने व स्टॉक न करने का आग्रह किया है।
बैठक में गोविंद भार्गव, सुब्रत लूथरा, अमरनाथ मेहरोत्रा, वैभव भार्गव, सोमनाथ मेहरोत्रा, राहुल भार्गव, संजीव चावला सहित कई प्रमुख उद्यमी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस संकट से निकलने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।