वाराणसी: काशी विद्यापीठ में जूनियर-सीनियर छात्रों के बीच हिंसक झड़प, जमकर चले पत्थर; हॉस्टल में असलहा लहराने का आरोप
भूमिका
धर्म और शिक्षा की नगरी वाराणसी एक बार फिर छात्र राजनीति और आपसी गुटबाजी के चलते अशांत हो गई है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) के आंबेडकर छात्रावास में मंगलवार को छात्रों के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट और पत्थरबाजी हुई। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद इतना बढ़ गया कि छात्रों ने एक-दूसरे पर पत्थरों से हमला किया, जिसमें दो छात्र घायल हो गए हैं।
विवाद की जड़: रैगिंग और पुराना मनमुटाव
मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह जूनियर और सीनियर छात्रों के बीच लंबे समय से चला आ रहा मनमुटाव है। जूनियर छात्रों का आरोप है कि सीनियर छात्र अक्सर उनका उत्पीड़न करते हैं और रैगिंग के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।
घटनाक्रम के अनुसार:
जूनियर छात्रों ने इसकी शिकायत वार्डन और विश्वविद्यालय प्रशासन से की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मंगलवार दोपहर को जूनियर छात्रों ने बाहर से (हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज) अपने समर्थकों को बुला लिया।
इसके बाद हॉस्टल के सीनियर छात्र भी लामबंद हो गए और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
हॉस्टल बना जंग का मैदान: असलहा लहराने का दावा
देखते ही देखते आंबेडकर छात्रावास के बाहर का नजारा बदल गया। दोनों तरफ से लगभग 50-60 छात्र एकत्र हो गए और ईंट-पत्थर चलने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों और छात्रों का दावा है कि इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने अवैध असलहा (हथियार) भी लहराया, जिससे वहां दहशत फैल गई।
जब बाहरी छात्र संख्या में कम पड़ने लगे, तो वे वहां से भाग खड़े हुए। सूचना मिलते ही सिगरा पुलिस और विद्यापीठ चौकी इंचार्ज भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को आता देख उपद्रवी छात्र मौके से फरार हो गए।
पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने परिसर में गश्त बढ़ा दी है।
सिगरा इंस्पेक्टर संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि छात्रों के बीच विवाद हुआ था, लेकिन असलहा लहराने की बात अभी तक निराधार लग रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि असलियत सामने आ सके।
कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को लिखित जानकारी दी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मुख्यमंत्री की नाराजगी और पिछला रिकॉर्ड
काशी विद्यापीठ में इस तरह की अराजकता नई बात नहीं है। इससे पहले भी परिसर में हवाई फायरिंग और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे कि शिक्षण संस्थानों में उपद्रव करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। बावजूद इसके, कैंपस में असलहा पहुंचना प्रशासन की बड़ी चूक माना जा रहा है।
निष्कर्ष और सुरक्षा पर सवाल
काशी विद्यापीठ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्थरबाजी और असलहा लहराने की खबर अभिभावकों और नए छात्रों के लिए चिंता का विषय है। यदि समय रहते रैगिंग और छोटे विवादों को नहीं सुलझाया गया, तो यह कैंपस की शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। फिलहाल, परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस फोर्स तैनात है।