लखीमपुर खीरी: डीजल-पेट्रोल के लिए मची त्राहि-त्राहि, ₹200 लीटर तक पहुंची कीमत; सूख रही किसानों की फसलें
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के रमियाबेहड़ क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ दिनों से पूरे इलाके में डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस का संकट इस कदर गहरा गया है कि आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि लोग सुबह 4 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर लाइन लगा रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड, कालाबाजारी चरम पर
रमियाबेहड़, ढखेरवा, तेलियार बोझिया और लखाही जैसे प्रमुख इलाकों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की भारी कमी देखी जा रही है। ढखेरवा और बीरबाबा जैसे कई पंप तेल न होने के कारण बंद कर दिए गए हैं। जहाँ तेल मिल भी रहा है, वहाँ प्रशासन ने सख्त राशनिंग लागू कर दी है। रमियाबेहड़ के एक पंप पर मोटरसाइकिल मालिकों को अधिकतम ₹200 और कार सवारों को मात्र ₹1500 का पेट्रोल दिया जा रहा है।
इस किल्लत का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व ईंधन की कालाबाजारी (Black Marketing) में जुट गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अभयपुर, लबेदपुर और परौरी जैसे गांवों में पेट्रोल और डीजल ₹200 प्रति लीटर के हिसाब से चोरी-छिपे बेचा जा रहा है। मजबूर होकर लोग अपनी जरूरतों के लिए यह भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं।
किसानों की बढ़ी मुश्किलें, फसलें बर्बाद होने की कगार पर
इस संकट की सबसे बड़ी मार क्षेत्र के किसानों पर पड़ी है। इस समय गन्ने और केले जैसी नकदी फसलों को सिंचाई की सख्त जरूरत है। सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पंपसेट बिना डीजल के ठप पड़े हैं। किसान रवि यादव और कल्लू ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनकी मेहनत की फसलें खेतों में खड़ी-खड़ी सूख रही हैं। यदि जल्द ही डीजल की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
किसानों का कहना है कि सरकार और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी किसानों की चिंता को और बढ़ा रही है।
गैस सिलेंडरों के लिए भी लंबी कतारें
सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि रसोई गैस (LPG) के लिए भी हाहाकार मचा हुआ है। रमियाबेहड़ की भारत गैस एजेंसी और लहबड़ी की इंडेन जैसी एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी भीड़ उमड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गैस सिलेंडर की भी कालाबाजारी शुरू हो गई है। घरेलू सिलेंडर, जिसकी कीमत निर्धारित है, वह ₹1800 में अवैध रूप से बेचा जा रहा है। गरीब तबके के लिए अब घर का चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है।
क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ईंधन का ऐसा संकट कभी नहीं देखा। वाहन चालक परेशान हैं क्योंकि उनके पास काम पर जाने के लिए साधन नहीं है। लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तुरंत दखल दे और तेल कंपनियों से बात कर आपूर्ति को सुचारू बनाए। साथ ही, कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
निष्कर्ष: लखीमपुर खीरी में गहराता यह ऊर्जा संकट आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है। यदि समय रहते आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को ठीक नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। प्रशासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ ईंधन वितरण की निगरानी करे।