रेलवे कर्मचारियों को बड़ी सौगात: अब बच्चों की पढ़ाई के बीच नहीं छूटेगा सरकारी आवास, बोर्ड ने बदले नियम
प्रयागराज/कौशांबी। भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अक्सर तबादले (Transfer) या प्रतिनियुक्ति (Deputation) के दौरान रेलकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों की पढ़ाई और सरकारी आवास (Railway Quarter) खाली करने की होती थी। रेलवे बोर्ड ने अब इस समस्या का समाधान करते हुए ‘क्वार्टर रिटेंशन’ की अवधि को बढ़ा दिया है।
क्या है नया नियम?
रेलवे बोर्ड की सामान्य पथ निदेशक नीलम यादव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब रेलकर्मी अपने बच्चों की शिक्षा के आधार पर अधिक अवधि तक सामान्य किराये पर सरकारी आवास अपने पास रख सकेंगे। यह आदेश उत्तर मध्य रेलवे (NCR) सहित सभी जोनल मुख्यालयों और रेल मंडलों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
बोर्ड परीक्षाओं वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत
सबसे बड़ी राहत उन रेलकर्मियों को मिली है जिनके बच्चे 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं।
- पुराना नियम: पहले नियमों के अनुसार, बच्चे की परीक्षा समाप्त होने के मात्र 15 दिन बाद ही कर्मचारी को आवास खाली करना पड़ता था।
- नया नियम: अब कर्मचारी अपने बच्चे के आखिरी पेपर (Last Exam) के बाद तीन महीने तक आवास अपने पास रख सकेंगे। खास बात यह है कि इस अवधि के दौरान उनसे कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं, बल्कि केवल सामान्य लाइसेंस शुल्क ही लिया जाएगा।
कक्षा 1 से 8वीं तक के लिए भी बदलाव
छोटे बच्चों के माता-पिता के लिए भी बोर्ड ने नियमों में ढील दी है। यदि रेलकर्मी का बच्चा कक्षा एक से आठवीं के बीच पढ़ रहा है, तो अब शैक्षणिक सत्र (Academic Session) समाप्त होने के एक महीने बाद तक आवास रखने की अनुमति होगी। पहले यह सीमा केवल 15 दिनों की थी। इससे कर्मचारियों को नए शहर में जाकर स्कूल ढूंढने और व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
किन शहरों के कर्मचारियों को होगा लाभ?
इस निर्णय का सीधा लाभ प्रयागराज, झांसी, आगरा, वाराणसी, मुरादाबाद, लखनऊ, बरेली (इज्जत नगर), अंबाला, जम्मू और फिरोजपुर समेत देश के सभी रेल मंडलों के हजारों कर्मचारियों को मिलेगा। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि इन नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं।
कर्मचारियों में खुशी की लहर
रेलवे यूनियनों और कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। कर्मचारियों का कहना है कि बीच सत्र में ट्रांसफर होने पर बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता था और जबरन आवास खाली कराए जाने से मानसिक तनाव बढ़ता था। अब 3 महीने का अतिरिक्त समय मिलने से वे अपने परिवार और बच्चों के भविष्य की योजना बेहतर ढंग से बना सकेंगे।
निष्कर्ष
रेलवे बोर्ड का यह मानवीय दृष्टिकोण न केवल रेलकर्मियों की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि उनके बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को भी सुरक्षित करेगा। यह कदम दर्शाता है कि विभाग अपने कर्मचारियों के कल्याण के प्रति संवेदनशील है।
मुख्य अपडेट्स एक नजर में:
| श्रेणी | पहले की समय सीमा | अब नई समय सीमा |
|---|---|---|
| 10वीं/12वीं बोर्ड परीक्षार्थी | परीक्षा के 15 दिन बाद | आखिरी पेपर के 3 महीने बाद तक |
| कक्षा 1 से 8वीं तक | सत्र अंत के 15 दिन बाद | सत्र अंत के 1 महीने बाद तक |
| किराया दर | सामान्य | सामान्य लाइसेंस शुल्क |