आगरा का SN मेडिकल कॉलेज बनेगा ‘मिनी एम्स’: ₹1200 करोड़ का मास्टरप्लान, अब दिल्ली-जयपुर नहीं जाना पड़ेगा
आगरा। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ताजनगरी आगरा का ऐतिहासिक सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) अब अपनी पुरानी पहचान बदलकर एक आधुनिक ‘मिनी एम्स’ के रूप में आकार लेने वाला है। अगले 4 से 5 वर्षों के भीतर यहाँ की स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी उन्नत हो जाएंगी कि न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि दिल्ली, राजस्थान (जयपुर) और हरियाणा के मरीज भी इलाज के लिए आगरा का रुख करेंगे।
इंटीग्रेटेड मास्टरप्लान: लेडी लॉयल और SN का विलय
इस महापरियोजना के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए लेडी लॉयल अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज को एक कर दिया गया है। अब यह पूरा परिसर 45 एकड़ की विशाल जमीन पर फैला होगा। इस कायाकल्प पर लगभग 1000 से 1200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य एक ही छत के नीचे ओपीडी, वार्ड, जांच और अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
दो चरणों में होगा निर्माण कार्य
सरकार और प्रशासन ने इस ‘मिनी एम्स’ के निर्माण को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया है:
चरण 1: बुनियादी और आपातकालीन सुविधाएं
पहले चरण में उन विभागों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिनकी सबसे अधिक आवश्यकता है:
- इमरजेंसी एंड ट्रामा सेंटर: 200 बेड की क्षमता वाला आधुनिक केंद्र।
- सर्जिकल एलाइड ब्लॉक: 300 बेड।
- मेडिसिन एलाइड ब्लॉक: 300 बेड।
- क्रिटिकल केयर ब्लॉक: 100 बेड।
- इसके साथ ही एकेडमिक ब्लॉक और एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक का भी निर्माण हो रहा है।
चरण 2: स्पेशलिटी और सुपर स्पेशलिटी
दूसरे चरण में उन रोगों के लिए अलग ब्लॉक बनेंगे जिनके लिए मरीजों को अक्सर दिल्ली भागना पड़ता है:
- कैंसर ब्लॉक: 300 बेड (रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की सुविधा)।
- सर्जिकल ब्लॉक: अतिरिक्त 300 बेड।
- पीडियाट्रिक ब्लॉक (बाल रोग): 250 बेड।
- पैरामेडिकल ब्लॉक: चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए।
किन रोगों का होगा वर्ल्ड क्लास इलाज?
मिनी एम्स बनने के बाद यहाँ निम्नलिखित गंभीर बीमारियों का इलाज और जटिल ऑपरेशन संभव होंगे:
- कैंसर (Oncology): आधुनिक मशीनों से सिकाई और सर्जरी।
- किडनी (Nephrology): डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट की संभावना।
- हृदय रोग (Cardiology): बाईपास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी।
- लिवर और पेट रोग (Gastroenterology): लिवर से जुड़ी गंभीर सर्जरी।
- फेफड़े और श्वसन तंत्र: एडवांस वेंटिलेटर और आईसीयू सपोर्ट।
ऐतिहासिक सफर: 1854 से 2026 तक
एसएन मेडिकल कॉलेज का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है:
- स्थापना: 1854 में ब्रिटिश राज के दौरान ‘थॉमसन अस्पताल’ के नाम से हुई।
- पहला बैच: 1857 में भारतीय डॉक्टरों का पहला बैच पास आउट हुआ।
- लेडी लॉयल: 1883 में महिला डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए अलग विभाग बना।
- नाम परिवर्तन: 1947 में उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू के नाम पर इसका नामकरण हुआ।
- वर्तमान क्षमता: यहाँ वर्तमान में एमबीबीएस की 200 और पीजी की 216 सीटें हैं, जबकि कुल बेड 1450 हैं।
अमर उजाला की मुहिम लाई रंग
क्षेत्र के मरीजों की पीड़ा को देखते हुए अमर उजाला ने एसएन मेडिकल कॉलेज को मिनी एम्स बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई थी। निरंतर खबरों और जन जागरूकता के माध्यम से इस मांग को शासन तक पहुँचाया गया, जिसके बाद जनप्रतिनिधियों ने सक्रियता दिखाई और आज यह सपना हकीकत बनने की राह पर है।
विशेषज्ञों की राय
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि, “अगले पांच वर्षों में यह इंटीग्रेटेड प्लान पूरी तरह जमीन पर उतर आएगा। हमारा लक्ष्य है कि मरीज को एक ही परिसर में हर छोटी-बड़ी जांच और ऑपरेशन की सुविधा मिले। यह संस्थान भविष्य में दिल्ली और जयपुर के बड़े अस्पतालों को टक्कर देगा।”
निष्कर्ष
आगरा में मिनी एम्स का बनना केवल ईंट-पत्थर की इमारत खड़ा करना नहीं है, बल्कि यह लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए ‘जीवनदान’ जैसा है। इससे न केवल इलाज सस्ता होगा, बल्कि मरीजों का कीमती समय भी बचेगा।