हरदोई

बलरामपुर: डीजे की तेज आवाज बनी काल; बिदककर रेलवे ट्रैक पर दौड़ीं भैंसें, ट्रेन की चपेट में आकर किसान समेत 5 की मौत

बलरामपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ मनोरंजन के लिए बजाया जा रहा डीजे (DJ) एक किसान और उसकी भैंसों के लिए काल बन गया। गैसड़ी क्षेत्र के सुखरामपुर गांव में मंगलवार की रात एक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से 65 वर्षीय किसान और उनकी पांच भैंसों की दर्दनाक मौत हो गई।

भैंस चराकर लौट रहे थे पारसनाथ

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुखरामपुर गांव निवासी पारसनाथ यादव (65) मंगलवार की शाम अपनी भैंसें चराने गए थे। रात में वह सभी पशुओं को लेकर घर लौट रहे थे। उनका घर रेलवे समपार फाटक से महज 100 मीटर की दूरी पर था।

डीजे की आवाज और बिदकीं भैंसें

​मृतक के बड़े बेटे गुड्डू यादव ने बताया कि रास्ते में पड़ने वाले एक घर में मांगलिक कार्यक्रम चल रहा था। जैसे ही पारसनाथ अपनी भैंसों को लेकर रेलवे ट्रैक के पास पहुंचे, डीजे पर अचानक बहुत तेज आवाज में गाना बजने लगा। इस अप्रत्याशित और तेज आवाज से भैंसें बुरी तरह बिदक गईं और अनियंत्रित होकर रेलवे ट्रैक की ओर भागने लगीं।

भैंसों को बचाने के प्रयास में गई जान

​अपनी भैंसों को संभालने और उन्हें रेलवे ट्रैक पर जाने से रोकने के लिए पारसनाथ यादव भी उनके पीछे दौड़े। वह भैंसों को वापस मोड़ने का प्रयास कर ही रहे थे कि तभी गोंडा से गोरखपुर की ओर जा रही एक तेज रफ्तार ट्रेन आ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पारसनाथ यादव और उनकी पांचों भैंसों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

तलाश के बाद मिला शव, गांव में मातम

​काफी देर तक पारसनाथ के घर न लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने उनकी तलाश शुरू की। रेलवे लाइन के किनारे पहुँचने पर उन्हें पारसनाथ और भैंसों के क्षत-विक्षत शव मिले। यह दृश्य देखकर परिवार में कोहराम मच गया। इस घटना से पूरे सुखरामपुर गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

जांच में जुटी पुलिस

​घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक दुर्विजय सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल

​यह घटना सार्वजनिक कार्यक्रमों में डीजे की तेज आवाज और उससे होने वाले ध्वनि प्रदूषण के गंभीर परिणामों को रेखांकित करती है। पशुओं में तेज आवाज के प्रति संवेदनशीलता और रेलवे ट्रैक के पास सार्वजनिक आयोजनों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

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