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UP: डिजिटल अरेस्ट से गंवाए थे 87 लाख रुपये, वापस मिले चार लाख, तीन करोड़ के ट्रांजेक्शन के नाम पर किया खेल

उत्तर प्रदेश में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित से करीब 87 लाख रुपये ठग लिए गए। राहत की बात यह रही कि पुलिस की सक्रियता से अब तक लगभग 4 लाख रुपये वापस दिलाए जा सके हैं।

क्या है पूरा मामला?

ठगों ने खुद को पुलिस/जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को कॉल किया। उन्होंने कहा कि उसके नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए हैं

वह एक बड़े मामले में फंस चुका है। डर पैदा करने के लिए “डिजिटल अरेस्ट” का हवाला दिया गया—यनी घर बैठे ही उसे लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया।

कैसे हुई ठगी?

पीड़ित को कई घंटों/दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा गयाउसे किसी से बात न करने की धमकी दी गई“जांच” के नाम पर बार-बार पैसे ट्रांसफर करवाए गएधीरे-धीरे कुल 87 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेजवा लिए गए पुलिस की कार्रवाईशिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम टीम ने तुरंत कार्रवाई की:ट्रांजेक्शन ट्रैक किए गएकुछ खातों को फ्रीज कराया गया

अब तक करीब 4 लाख रुपये रिकवर कर पीड़ित को लौटाए गए“डिजिटल अरेस्ट” क्या होता है?यह असल में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ठगों का एक नया तरीका है, जिसमें वे:खुद को पुलिस/CBI/ED अधिकारी बताते हैं

वीडियो कॉल पर “हिरासत” जैसा माहौल बनाते हैंडर और दबाव में पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैंकैसे बचें?कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करतीअनजान कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करेंडराने वाली भाषा (“अभी गिरफ्तारी”, “बड़ा केस”) से सतर्क रहेंतुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करेंनजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएंयह मामला दिखाता है

कि ठग अब मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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