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UP: संविदा कार्मिकों की छटनी मामले में सात दिन में मांगी रिपोर्ट, कहा- प्रदेश की विद्युत व्यवस्था बदहाल हो रही

UP: Report Sought Within Seven Days on Layoffs of Contractual Workers; State's Power Infrastructure Said to be

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में संविदा कर्मचारियों की लगातार छंटनी पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने चिंता जताई। अध्यक्ष ने कहा कि इससे विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है और राजस्व नुकसान बढ़ रहा है। नियामक आयोग ने निगम प्रबंधन से सात दिन में रिपोर्ट मांगी है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की जन सुनवाई के संविदा कर्मचारी की छांटने का मुद्दा उठाया। इस पर नियामक आयोग ने निगम प्रबन्धन से सात दिन में जवाब मांगा है। 

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष केंद्र एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने सुनवाई में कहा कि संविदा कर्मियों की लगातार छटनी से पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था बदहाल हो रही है।

परिषद ने प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया कि प्रबंधन द्वारा लिए जा रहे निर्णय जानबूझकर विद्युत आपूर्ति बाधित करने की श्रेणी में आते हैं, जो हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न करते हैं। ऐसे में इस प्रकार के प्रबंधन के खिलाफ  एस्मा लागू किया जाना चाहिए। 

बरेली में जब यह मुद्दा उठाया गया था तो इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन चेंबर ऑफ कॉमर्स राइस मिल एसोसिएशन सहित सभी उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने उपभोक्ता परिषद की बात का समर्थन किया था और कहा था बरेली में 300 इंडस्ट्री पर एक लाइनमैन है कैसे विद्युत आपूर्ति चलेगी सबको बाहर कर दोगे तो विद्युत आपूर्ति हड़ताल से भी बदतर हो जाएगी

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा कॉन्ट्रैक्ट मैनपावर पर 417 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, इसके बावजूद भी फील्ड स्तर के कर्मचारियों की लगातार छटनी की जा रही है, जिससे विद्युत आपूर्ति बहाली में अत्यधिक विलंब हो रहा है और राजस्व का नुकसान बढ़ रहा है।

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