लखनऊ

​यूपी में कुदरत का कहर: आंधी-बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट, 42 जिलों में मौसम विभाग की चेतावनी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मार्च के महीने में बढ़ती तपिश के बीच अचानक आए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने पूरे प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट ला दी है। रविवार को राज्य के कई हिस्सों में हुई धूलभरी आंधी और बारिश ने जहाँ लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

पश्चिमी विक्षोभ का व्यापक असर

​आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के अनुसार, वर्तमान में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के ऊपर से गुजर रहा है। इसके प्रभाव से तराई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में रविवार सुबह से ही बादलों का डेरा जमा रहा। मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर और एनसीआर के गाजियाबाद व नोएडा समेत राजधानी लखनऊ में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

​आंकड़ों की बात करें तो रविवार को मुजफ्फरनगर में सर्वाधिक 8.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि मेरठ में 5.1 मिमी और बरेली में 2.5 मिमी बारिश हुई।

आज इन जिलों में ओले गिरने की संभावना

​मौसम विभाग ने सोमवार (16 मार्च 2026) के लिए बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने प्रदेश के करीब 17 जिलों में ओलावृष्टि (Hailstorm) का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में शामिल हैं:

  • ​आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर।
  • ​संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर।
  • ​गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच।
  • ​लखीमपुर खीरी, सीतापुर और अंबेडकर नगर।

​इन इलाकों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें, क्योंकि ओलावृष्टि से सरसों और गेहूं की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।

वज्रपात (आकाशीय बिजली) का खतरा

​बारिश और ओलों के साथ-साथ मौसम विभाग ने 40 से अधिक जिलों में वज्रपात की आशंका जताई है। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, और सहारनपुर जैसे बड़े शहरों सहित मुरादाबाद, बरेली और पीलीभीत में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान वे पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास शरण न लें।

किसानों की बढ़ी धड़कनें

​मार्च का महीना रबी की फसलों की कटाई और पकने का समय होता है। तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) के कारण कई इलाकों में खड़ी फसलें बिछ गई हैं। यदि अगले दो दिनों तक ओलावृष्टि और बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो उत्पादन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

आगे कैसा रहेगा मौसम?

​वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, राहत की उम्मीद अभी कम है। 19 मार्च से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसका मतलब है कि होली से पहले प्रदेशवासियों को एक बार फिर मौसम के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। आने वाले 48 घंटों में पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश होने के आसार हैं।

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