एलपीजी संकट : फिर लौटे लकड़ी-कोयला, भट्ठी के दिन, सामग्री की लागत और कीमत बढ़ी
कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:06 PM IST

हरदोई। खाड़ी देशों में युद्ध के हालातों के बीच घरेलू की वरीयता के बीच व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति न होने से होटल, ढाबा संचालक और दुकानदार खाद्य सामग्री तैयार करने के लिए फिर से लकड़ी-कोयला की भट्ठी पर आ गए हैं। कोयला-लकड़ी की कीमतों से दुकानदारों के साथ ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर भार बढ़ गया है।
खाद्य सामग्री की लागत और कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने से दुकानदार कोयला-लकड़ी की भट्ठी और बिजली वाले इंडक्शन चूल्हे को उपयोग में ला रहे हैं। दुकानदारों ने लागत बढ़ने से पांच वाला समोसा आठ रुपये, 20 वाला कबाब पराठा 25 और 25 की आलू टिक्की 30 रुपये में कर दी है।पेश है कस्बा और नगरीय क्षेत्र के हालात पर एक रिपोर्ट :
मल्लावां में व्यावसायिक सिलिंडर करीब एक माह से न तो बुक हो रहा है और न ही मिल रहा है। सिलिंडर न मिलने पर मुख्य चौराहे के बाबा स्वीट हाउस के संचालक नीलेश गुप्ता ने बताया कि करीब एक माह से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला है। वह कोयले की भट्टी पर चाट, समोसा, मिठाई आदि बनवा रहे हैं। वैष्णवी मिष्ठान भंडार के संचालक अनूप यज्ञसैनी ने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन एक सिलिंडर की खपत है, एक माह से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला। इससे 1,800 रुपये में मिलने वाला कोयला 2,200 रुपये, 500 रुपये में मिलने वाले लकड़ी के गुटके 800 रुपये में खरीदने पड़ रहे हैं। यही हाल जगदीश समोसा भंडार का भी है। इंडियन गैस सर्विस के संचालक अवधेश कटियार ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति नहीं आ रही है इससे डिलीवरी नहीं दी जा पा रही।

फोटो 23 : टड़ियावां में मिट्टी की भट्ठी पर लकड़ी से समोसा व मिर्चा बनाते दुकानदार प्रमोद। संवाद
