हरदोई में भीषण सड़क हादसा: दवा लेने जा रहे दंपती और मासूम बेटी की मौत, मंदिर में उत्सव के बीच पसरा सन्नाटा
हरदोई (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। यहाँ उन्नाव-कटरा मार्ग पर कोतवाली क्षेत्र के ककरा के पास एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई। एक छोटी सी चूक और ओवरटेक करने की कोशिश ने हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया। इस हादसे में बाइक सवार पति, पत्नी और उनकी 10 वर्षीय मासूम बेटी की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे की पूरी जानकारी
घटना बृहस्पतिवार शाम करीब 4 बजे की है। ईसेपुर निवासी 30 वर्षीय मोनू अपनी पत्नी नीलम (28) और बड़ी बेटी लक्ष्मी (10) के साथ बाइक पर सवार होकर घर से निकले थे। जानकारी के मुताबिक, मोनू और नीलम को पिछले दो दिनों से बुखार था, जिसके चलते वे दवा लेने के लिए अस्पताल जा रहे थे।
उन्नाव-कटरा मार्ग पर ककरा के पास मोनू ने सामने चल रही एक कार को ओवरटेक करने की कोशिश की। इसी दौरान सामने से तेज रफ्तार में आ रहे एक कंटेनर से उनकी बाइक की सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों कंटेनर के पहियों के नीचे आ गए और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
गांव में खुशियों के बीच छाया मातम
हादसे की खबर जब ईसेपुर गांव पहुँची, तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। गांव में रामऔतार द्वारा बनवाये गए नए मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम चल रहा था। मंदिर में घंटे-घड़ियाल बज रहे थे और रामचरितमानस की चौपाइयां गूंज रही थीं। मोनू की मां रामवती और अन्य परिजन भी इसी धार्मिक आयोजन में शामिल थे।
जैसे ही हादसे की खबर मंदिर तक पहुँची, भजन-कीर्तन की जगह चीख-पुकार मच गई। मंदिर में मौजूद लोग बदहवास होकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। खुशियों वाले घर में मातम छा गया और प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव शोक में बदल गया।
दो मासूमों के सिर से उठा माता-पिता का साया
मोनू के तीन बच्चे थे। बड़ी बेटी लक्ष्मी की इस हादसे में मौत हो गई, जबकि 8 साल की बेटी रुमझुम और 5 साल का बेटा स्वागत घर पर ही थे। घर से निकलते समय मोनू ने अपनी भाभी शीला से कहा था, “जब तक हम वापस न आएं, बच्चों का ख्याल रखना।” किसी को नहीं पता था कि मोनू और नीलम अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। अब इन दोनों छोटे बच्चों की जिम्मेदारी परिवार के अन्य सदस्यों के कंधों पर आ गई है।
पुलिस की कार्रवाई और स्थिति
हादसे के बाद चालक कंटेनर छोड़कर मौके से फरार हो गया। सड़क पर शवों के पड़े होने के कारण मार्ग पर करीब 20 मिनट तक लंबा जाम लगा रहा। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस को मृतका नीलम के पर्स से मिले आधार कार्ड के जरिए उनकी पहचान करने में मदद मिली।
कोतवाल वीरेंद्र पंकज ने बताया कि कंटेनर को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है और फरार चालक की तलाश की जा रही है। परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: सड़क सुरक्षा की अनदेखी पड़ी भारी
यह हादसा हमें एक बार फिर याद दिलाता है कि सड़क पर एक पल की जल्दबाजी और ओवरटेक करने का गलत फैसला कितना आत्मघाती हो सकता है। तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी न केवल आपकी जान जोखिम में डालती है, बल्कि पीछे छूट गए मासूम बच्चों का भविष्य भी अंधकार में धकेल देती है।