पिछली सरकारों ने शिक्षा को बनाया व्यापार, हमने जलाई विकास की अलख’: काशी में बोले सीएम योगी
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वाराणसी दौरे के दौरान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित किया। शिवपुर स्थित राजकीय क्वींस कॉलेज में आयोजित ‘स्कूल चलो अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 2017 से पहले शिक्षा कभी भी सरकारों के एजेंडे में नहीं थी, बल्कि वे नकल माफियाओं को संरक्षण देने में व्यस्त थे।
नकल माफिया और पिछली सरकारें
मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले की सरकारों के पास न तो शिक्षा के लिए कोई विजन था और न ही बच्चों के भविष्य के प्रति कोई संवेदना। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने जानबूझकर शिक्षा के स्तर को गिराया ताकि ‘नकल व्यापार’ फल-फूल सके। सीएम ने कहा, “जब विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होगी, तभी नकल माफिया सफल होंगे। उन लोगों ने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया ताकि उनका राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध हो सके।”
ड्रॉप आउट रेट में भारी गिरावट
शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि प्रदेश में जो ड्रॉप आउट रेट (स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर) कभी 19 प्रतिशत हुआ करती थी, वह अब घटकर मात्र 3 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि अब इसे ‘शून्य’ पर लाने की जरूरत है। सीएम ने जोर दिया कि जब तक एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित रहेगा, तब तक सामाजिक न्याय का लक्ष्य अधूरा है।
‘स्कूल चलो अभियान’ और नई सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 से 15 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य हर उस बच्चे को स्कूल तक लाना है जो किन्हीं कारणों से शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर है।
- निःशुल्क सामग्री: बेसिक शिक्षा के बच्चों को 15 अप्रैल और 15 जुलाई को दो चरणों में ड्रेस, कॉपी-किताबें और स्टेशनरी दी जा रही है।
- सीधा लाभ (DBT): भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए बच्चों के परिजनों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं।
- कायाकल्प: ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, शुद्ध पेयजल और स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश में अब तक 25 लाख से अधिक बेटियों को ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ का लाभ दिया गया है। इसके अलावा, जिन ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए विद्यालयों के निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया गया है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में संचालित 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को, जो पहले कक्षा 8 तक थे, अब इंटरमीडिएट (कक्षा 12) तक अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है।
साक्षर बच्चा, समृद्ध प्रदेश
सीएम योगी ने एक प्रेरक संदेश देते हुए कहा, “जब बच्चा साक्षर होता है, तो समाज का विकास होता है और प्रदेश समृद्ध होता है। लेकिन यदि बच्चे निरक्षर रह गए, तो समाज निर्धन और प्रदेश ‘बीमारू’ की श्रेणी में ही बना रहेगा।” उन्होंने शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक समानता लाने का सबसे शक्तिशाली माध्यम बताया।
मेधावी बच्चों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं बच्चों के बीच जाकर उनसे बातचीत की। उन्होंने कक्षा 1 से 7 तक के छात्र-छात्राओं, जिनमें विकास, आंशिक, श्रेया, कजरी और अन्य शामिल थे, को पाठ्य पुस्तकें वितरित कीं। साथ ही, ‘निपुण’ श्रेणी में आने वाले मेधावी छात्रों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया।
निष्कर्ष
वाराणसी की धरती से मुख्यमंत्री का यह संबोधन केवल एक सरकारी आंकड़ेबाजी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक ‘शिक्षित प्रदेश’ बनाने का संकल्प था। ‘स्कूल चलो अभियान’ के माध्यम से सरकार अब हर द्वार पर दस्तक दे रही है ताकि उत्तर प्रदेश का भविष्य क्लासरूम में बैठकर तैयार हो सके।