सपा का ‘ऑपरेशन क्लीन’: प्रशांत कुमार की टीम सिखाएगी भाजपा आईटी सेल की काट, हर विधानसभा का होगा माइक्रो-सर्वे
लखनऊ/कानपुर: आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ने लगा है। भारतीय जनता पार्टी के अभेद्य माने जाने वाले ‘आईटी सेल’ और सोशल मीडिया तंत्र को चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपना मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस बार सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रशांत कुमार (पीके) की विशेषज्ञ टीम को मैदान में उतारा है, जो न केवल कार्यकर्ताओं को डिजिटल युद्ध के गुर सिखाएगी, बल्कि जमीनी स्तर पर हर विधानसभा क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण भी करेगी।
भाजपा आईटी सेल के ‘फर्जी नैरेटिव’ पर सर्जिकल स्ट्राइक
गुरुवार को लखनऊ में हुई एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में सपा के रणनीतिकारों ने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे ‘भ्रम’ पर गहरी चिंता व्यक्त की। पीके की टीम ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसे फर्जी अकाउंट्स सक्रिय हैं जो ब्राह्मण, यादव, मुस्लिम और महिलाओं के नाम से बनाए गए हैं।
रणनीति के मुख्य बिंदु:
- पहचान और सतर्कता: कार्यकर्ताओं को सिखाया जाएगा कि कैसे छद्म नामों वाले फर्जी अकाउंट्स को पहचानें।
- तार्किक जवाब: पीके की टीम सपा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेगी कि वे बिना उत्तेजित हुए तथ्यों और तर्क के आधार पर सोशल मीडिया पर प्रोपेगंडा का जवाब दें।
- प्रशिक्षण शिविर: टीम जिलों का दौरा कर विशेष कार्यशालाएं आयोजित करेगी, जिसमें डिजिटल सुरक्षा और नैरेटिव बिल्डिंग के तरीके बताए जाएंगे।
जिलों की ग्रेडिंग: कानपुर महानगर ‘औसत’ श्रेणी में
प्रशांत कुमार की टीम ने बूथ कमेटियों और बीएलए (Booth Level Agents) की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश के जिलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है:
- शीर्ष श्रेणी: वे जिले जहाँ 80% से अधिक बूथ कमेटियों का गठन पूरा हो चुका है।
- औसत श्रेणी: 75% लक्ष्य पूरा करने वाले जिले। कानपुर महानगर को फिलहाल इसी श्रेणी में रखा गया है।
- निम्न श्रेणी: जहाँ काम 75% से कम हुआ है।
महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद और वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिंटू के अनुसार, पीके की टीम जल्द ही कानपुर का दौरा करेगी और बूथ स्तर की कमियों को दूर करने के लिए विशेष रोडमैप तैयार करेगी।
हर विधानसभा का होगा अपना ‘एक्स-रे’
यह टीम केवल डिजिटल मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगी। पीके की टीम का हर सदस्य प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जाकर जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण करेगा। इस सर्वे में जनता का मूड, स्थानीय विधायकों की छवि और जातीय समीकरणों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी टिकट वितरण और चुनावी रैलियों की रूपरेखा तय होगी।
सोशल मीडिया पर ‘प्रोपेगंडा’ से बचाव
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि विपक्षी दल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए पार्टी की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बचने के लिए सपा अब ‘रिएक्टिव’ होने के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ मोड में काम करेगी। कार्यकर्ताओं को बताया गया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी भ्रामक जानकारी को फैलने से पहले ही उसे सही तथ्यों के साथ काउंटर किया जाए।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव का यह कदम साफ संकेत देता है कि सपा अब पारंपरिक राजनीति के साथ-साथ आधुनिक चुनावी मैनेजमेंट और डेटा एनालिटिक्स को भी उतनी ही प्राथमिकता दे रही है। भाजपा के मजबूत सूचना तंत्र को टक्कर देने के लिए प्रशांत कुमार की टीम का अनुभव सपा के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।