सीतापुर अग्निकांड का कहर: 7 साल की मीनाक्षी ने भी तोड़ा दम, अब तक 3 की मौत; राख के ढेर में बदला गांव
सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक समाचार सामने आया है। सदरपुर थाना क्षेत्र के सरैया चलाकापुर गांव में शनिवार रात लगी भीषण आग ने एक और मासूम की जिंदगी छीन ली है। लखनऊ में इलाज के दौरान सात वर्षीय मीनाक्षी ने रविवार सुबह दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर तीन हो गई है, जबकि पूरा गांव गम और मातम के साये में डूबा हुआ है।
कैसे हुआ हादसा?
घटना शनिवार रात की है जब सरैया चलाकापुर गांव के लोग रोज की तरह अपने घरों में सो रहे थे। अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। ग्रामीण जब तक कुछ समझ पाते और आग बुझाने का प्रयास करते, तब तक आग ने एक के बाद एक 14 घरों को अपनी चपेट में ले लिया। फूस के घर होने के कारण लपटें इतनी तेज थीं कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
मृतकों और घायलों का विवरण
इस भीषण अग्निकांड में झुलसने के कारण फूलमती और इदुरा की मौके पर ही या कुछ समय बाद मौत हो गई थी। सात साल की मासूम मीनाक्षी गंभीर रूप से झुलस गई थी, जिसे आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और रविवार की सुबह उसकी सांसे थम गईं। गांव के अन्य कई लोग भी इस आग में मामूली रूप से झुलसे हैं, जिनका प्राथमिक उपचार किया गया है।
राख में तब्दील हो गया आशियाना
आग इतनी भयावह थी कि गांव के 14 परिवारों के सिर से छत छिन गई है। पीड़ितों का कहना है कि घर में रखा अनाज, कपड़े, नकदी और बच्चों की किताबें सब कुछ जलकर राख हो गया है। रविवार सुबह जब सूरज उगा, तो गांव की गलियों में सिर्फ धुआं और बिलखते हुए लोग नजर आ रहे थे। जिन घरों में कल तक हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब सिर्फ काली राख के ढेर बचे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और सहायता
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने स्थिति का जायजा लिया और तुरंत राजस्व टीम को गांव भेजने के निर्देश दिए। डीएम ने बताया कि:
- राजस्व टीम नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है।
- उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
- रिपोर्ट के आधार पर पीड़ितों को दैवीय आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
तहसील प्रशासन के अधिकारी सुबह से ही गांव में डेरा डाले हुए हैं। बेघर हुए लोगों के लिए भोजन और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जा रही है।
गांव में पसरा सन्नाटा
सरैया चलाकापुर गांव में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है। मीनाक्षी की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी गहरा दुख है कि प्रशासन की मदद मिलने में देरी न हो, क्योंकि उनके पास अब पहनने के लिए कपड़े तक नहीं बचे हैं।
निष्कर्ष: सुरक्षा की चुनौती
सीतापुर का यह अग्निकांड एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों और कच्चे घरों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती हैं। प्रशासन को चाहिए कि राहत कार्यों में तेजी लाए ताकि इन बेघर हुए परिवारों को फिर से खड़ा होने का संबल मिल सके।