कानपुर: सरकारी काम में रोड़ा और गुंडागर्दी! कुत्ते पकड़ने गई नगर निगम टीम को बेल्टों से पीटा, तीन कर्मचारी लहूलुहान
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी ड्यूटी कर रहे नगर निगम के कर्मचारियों पर भीड़ ने हिंसक हमला कर दिया। मामला पनकी थाना क्षेत्र के गंगागंज भाग-दो का है, जहाँ बुधवार देर रात आवारा कुत्तों को पकड़ने गई टीम को स्थानीय लोगों के गुस्से और मारपीट का सामना करना पड़ा। इस हमले में नगर निगम के तीन कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
IGRS शिकायत पर हुई थी कार्रवाई
नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके निरंजन ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि गंगागंज के एक निवासी ने उत्तर प्रदेश सरकार के IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि क्षेत्र के एक विशेष परिवार ने 4-5 देसी कुत्तों को पाल रखा है, जो न केवल पालतू हैं बल्कि बेहद आक्रामक भी हो चुके हैं। ये कुत्ते आए दिन राहगीरों, बच्चों और दुपहिया वाहन सवारों पर हमला कर उन्हें काट रहे थे, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल था।
इसी शिकायत का संज्ञान लेते हुए नगर निगम की डॉग कैचिंग टीम बुधवार रात करीब 12 बजे मौके पर पहुँची थी।
बहस से शुरू हुआ विवाद, बेल्टों से हुई पिटाई
जैसे ही नगर निगम की टीम ने कुत्तों को जाल में फंसाने की प्रक्रिया शुरू की, कुत्तों के कथित मालिक और उनके परिवार के लोग घर से बाहर निकल आए। कर्मचारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि वे सरकारी आदेश का पालन कर रहे हैं और आईजीआरएस शिकायत के आधार पर आए हैं। लेकिन, आरोप है कि परिवार के लोग सुनने को तैयार नहीं थे और उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि परिवार के सदस्यों और उनके कुछ समर्थकों ने टीम पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने कर्मचारियों को सड़क पर गिरा-गिराकर लात-घूसों और बेल्टों से बेरहमी से पीटा। इस दौरान चीख-पुकार मच गई और पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
पिटाई के दौरान मौके पर मौजूद कुछ जागरूक नागरिकों ने अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह सरकारी कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जा रहा है। वीडियो साक्ष्य के रूप में पुलिस के पास भी पहुँच चुका है।
अस्पताल में भर्ती हैं घायल कर्मचारी
इस हिंसक झड़प में नगर निगम के तीन कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनके सिर, पीठ और हाथ में चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद सहकर्मियों ने उन्हें पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार जारी है। कर्मचारियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है और उन्होंने काम रोकने की चेतावनी भी दी है।
पुलिसिया कार्रवाई का इंतज़ार
पनकी थाना प्रभारी मनोज सिंह ने बताया कि ‘यूपी 112’ के माध्यम से उन्हें मारपीट की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद तुरंत पुलिस बल मौके पर भेजा गया। हालांकि, पुलिस के पहुँचने से पहले ही हमलावर मौके से फरार हो गए।
पुलिस का कहना है कि नगर निगम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक लिखित तहरीर (Complaint) नहीं दी गई है। डॉ. आरके निरंजन ने आश्वासन दिया है कि विभाग जल्द ही नामजद रिपोर्ट दर्ज कराएगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और लोक सेवकों पर हमला करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: सरकारी सेवाओं के लिए बढ़ता जोखिम
कानपुर की यह घटना एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा करती है। जब नगर निगम की टीमें जनता की ही सुरक्षा के लिए (कुत्तों के आतंक को कम करने) निकलती हैं, तो उन्हीं पर हमला होना कानून व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।