बेटियों ने बढ़ाई शान: बरेली में 783 महिला रिक्रूट बनीं सिपाही, वर्दी पहन माता-पिता को किया सैल्यूट; भावुक कर देंगी ये कहानियां
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की पुलिस लाइन में रविवार का दिन खुशियों और गर्व की नई इबारत लिख गया। महीनों के कड़े प्रशिक्षण के बाद जब 783 महिला रिक्रूटों ने कदमताल करते हुए पासिंग आउट परेड (Passing Out Parade) पूरी की, तो वे आधिकारिक तौर पर ‘सिपाही’ बन गईं। इस मौके पर नजारा बेहद भावुक था; कहीं बेटी ने अपने मजदूर पिता के सिर पर सिपाही की पगड़ी रखी, तो कहीं किसान पिता ने अपनी वर्दीधारी बेटी को सैल्यूट किया।
संघर्षों से सफलता तक का सफर
बरेली पुलिस लाइन में आयोजित इस दीक्षांत परेड की खास बात यह थी कि सिपाही बनने वाली अधिकांश बेटियां साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं। इनमें से किसी के पिता किसान हैं, तो किसी की मां ने मजदूरी करके अपनी लाडली को इस मुकाम तक पहुंचाया है। प्रशिक्षण पूरा करने वाली इन बेटियों ने समाज के उन तानों का भी जवाब दिया है, जो अक्सर लड़कियों की पढ़ाई और तैयारी पर उठाए जाते थे।
एडीजी रमित शर्मा ने ली परेड की सलामी
परेड के मुख्य अतिथि एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा रहे। उन्होंने एसएसपी अनुराग आर्य के साथ खुली जीप में परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। इस अवसर पर होनहार रिक्रूटों को सम्मानित भी किया गया। दीक्षा चौधरी को ‘सर्वोत्तम रिक्रूट’ (Overall Topper) के रूप में पुरस्कृत किया गया। उनके अलावा आरती, ममता यादव, वंदना और कविता रानी जैसी कई अन्य रिक्रूटों को भी उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
प्रेरणा की मिसाल: संघर्ष की कुछ अनकही कहानियां
1. मजदूरी कर मां ने पाला, अब बेटी बनी सिपाही:
बुलंदशहर की निशु की कहानी सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली है। 2018 में पिता के निधन के बाद उनकी मां ने मजदूरी करके उन्हें पढ़ाया। निशु ने बताया कि जो रिश्तेदार कभी मां को दूसरी शादी करने की सलाह देते थे, आज वही उनकी सफलता पर बधाई दे रहे हैं। निशु अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और मौसेरी बहन पायल (जो दरोगा हैं) को देती हैं।
2. किसान की दोहरी खुशी:
बुलंदशहर की ही दीपिका शर्मा के घर में रविवार को दोहरी दिवाली जैसा माहौल था। दीपिका जहां बरेली में सिपाही बनीं, वहीं उनका सगा भाई आगरा में सिपाही बनकर पास आउट हुआ। मामूली किसान पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का दिन और कोई नहीं हो सकता।
3. मजदूर की दो बेटियां एक साथ बनीं रक्षक:
मुजफ्फरनगर की सगी बहनें मोनिका और ज्योति ने एक साथ ट्रेनिंग पूरी की। उनके पिता बीमार रहते हैं और छोटा सा खेत है। उनके भाई ने सहारा देकर दोनों बहनों को इस काबिल बनाया कि आज वे पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं।
4. बीसीए पास पूजा का जुनून:
अलीगढ़ की पूजा ने बीसीए और डीएलएड करने के बाद पुलिस विभाग को चुना। उनके पिता किसान हैं। पूजा का कहना है कि वर्दी पहनना उनका सपना था, लेकिन वह यहीं नहीं रुकेंगी और नौकरी के साथ आगे की उच्च परीक्षाओं की तैयारी जारी रखेंगी।
अनुशासन और निष्ठा का पाठ
परेड के अंत में सभी नए सिपाहियों को सत्यनिष्ठा और अनुशासन की शपथ दिलाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन भी ऑनलाइन सुनाया गया। अधिकारियों ने नए सिपाहियों को सिखाया कि पुलिस की वर्दी केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सेवा और समाज में सुरक्षा का भाव पैदा करने की जिम्मेदारी है।
समाज के लिए संदेश
बरेली की ये तस्वीरें और कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि अगर बेटियों को सही अवसर और परिवार का साथ मिले, तो वे विपरीत परिस्थितियों में भी आसमान छू सकती हैं। इन 783 महिला सिपाहियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उन हजारों ग्रामीण लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण है जो खाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं।
निष्कर्ष: बरेली पुलिस लाइन में बिखरी ये मुस्कानें बता रही हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस को न केवल नए जवान मिले हैं, बल्कि समाज को सशक्त और स्वावलंबी महिलाओं की एक नई पीढ़ी मिली है।