आगरा में सियासी पारा गर्म: लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतरे कांग्रेसी, पीएम मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
आगरा। उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर उफान पर है। राजामंडी स्थित कांग्रेस कार्यालय पर रविवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में लाठी-डंडे लेकर जमा हो गए। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद माहौल काफी देर तक गरमाया रहा।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ें दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट (AI Summit) से जुड़ी हैं। दरअसल, समिट के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के जवाब में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने आगरा के राजामंडी स्थित कांग्रेस कार्यालय पर राहुल गांधी का पुतला फूंकने का एलान किया था।
जैसे ही भाजपा के इस एलान की खबर कांग्रेस खेमे में पहुंची, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष अमित सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता लाठी-डंडे लेकर कार्यालय के बाहर डट गए। उनका कहना था कि वे किसी भी कीमत पर भाजपा कार्यकर्ताओं को पुतला दहन नहीं करने देंगे।
भारी पुलिस बल की तैनाती
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। पुलिस बल ने कांग्रेस कार्यालय की घेराबंदी की ताकि किसी भी तरह की हिंसक झड़प को रोका जा सके। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन सबका अधिकार है, लेकिन भाजपा सत्ता के नशे में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
नेताओं ने साधा निशाना
महानगर अध्यक्ष अमित सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भाजपा की नीतियां जनविरोधी हैं। जब हमारे कार्यकर्ता दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें दबाया जाता है। अगर यहां पुतला जलाने की कोशिश की गई, तो कांग्रेस ईंट का जवाब पत्थर से देना जानती है।”
इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे:
- अनुज शर्मा और अश्वनी बिट्टू
- कपिल गौतम और याकूब शेख
- बुरहान शमशी और दीपक शर्मा
- सतीश सिकरवार, गौरव शर्मा, हेमंत चाहर और सलमान कुरैशी
आगामी चुनाव और सियासी समीकरण
फरवरी 2026 में हो रही यह हलचल संकेत दे रही है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में राजनीतिक टकराव और बढ़ने वाला है। आगरा, जो कभी भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है, वहां विपक्षी दलों की सक्रियता सत्ताधारी दल के लिए चिंता का विषय बन सकती है। भारत मंडपम की घटना का असर अब स्थानीय स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है।