अयोध्या: भीषण गर्मी में रामलला को मिलेगी शीतलता, गर्भगृह में लगे कूलर; भोग में शामिल हुए शीतल व्यंजन
रामलला की सेवा में उमड़ी आस्था: गर्मी से बचाने के विशेष इंतजाम
अयोध्या। उत्तर प्रदेश में पारा चढ़ते ही भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया है। ऐसे में अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला को गर्मी की तपिश से बचाने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने विशेष इंतजाम किए हैं। आस्था और आधुनिकता के संगम के साथ गर्भगृह के वातावरण को शीतल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, ताकि प्रभु को गर्मी का अहसास न हो।
गर्भगृह में लगे तीन आधुनिक कूलर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, बढ़ते तापमान को देखते हुए रामलला के गर्भगृह में तीन अत्याधुनिक कूलर लगाए गए हैं। इन कूलरों को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि विग्रह के आसपास का तापमान संतुलित रहे और गर्भगृह में ठंडक बनी रहे। इन कूलरों के माध्यम से ताजी और ठंडी हवा का प्रवाह सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे मंदिर के भीतर का वातावरण सुखद हो गया है।
रामलला के ‘भोग’ और ‘चर्या’ में बड़ा बदलाव
गर्मी के मौसम को देखते हुए केवल वातावरण ही नहीं, बल्कि प्रभु के खान-पान और पहनावे में भी बदलाव किया गया है:
- शीतल भोग: अब रामलला को लगाए जाने वाले भोग में ठंडी तासीर वाली चीजों को शामिल किया गया है। भोग में अब रसीले फल, मिश्री, शीतल पेय और रबाड़ी जैसे व्यंजनों की मात्रा बढ़ा दी गई है।
- सूती वस्त्र: रामलला को अब गर्मी के अनुकूल हल्के और बारीक मलमल व सूती वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं, जो शीतलता प्रदान करते हैं।
- इत्र सेवा: विग्रह पर लगाए जाने वाले सुगंधित इत्र में भी बदलाव किया गया है। अब चंदन और गुलाब जैसे ठंडी सुगंध वाले इत्रों का प्रयोग अधिक किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा का भी रखा जा रहा ध्यान
रामलला के दर्शन के लिए प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुँच रहे हैं। गर्मी के कारण भक्तों को परेशानी न हो, इसके लिए ट्रस्ट ने निम्नलिखित व्यवस्थाएं की हैं:
- मैयटिंग: मंदिर परिसर के रास्तों पर जूट की कालीन (मैयटिंग) बिछाई गई है, जिस पर निरंतर पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि नंगे पैर चलने वाले भक्तों के पैर न जलें।
- पेयजल की उपलब्धता: दर्शन मार्ग पर जगह-जगह ठंडे पानी और ओआरएस (ORS) की व्यवस्था की गई है।
- छायादार गलियारे: भक्तों की कतारों के ऊपर टेंट और छायादार कवर लगाए गए हैं।
मंदिर प्रशासन का बयान
मंदिर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि रामलला की सेवा एक बालक के रूप में की जाती है, इसलिए मौसम के अनुसार उनकी चर्या में बदलाव करना परंपरा का हिस्सा है। आधुनिक साधनों का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि प्राचीन परंपरा और भक्तों की आस्था के बीच सुरक्षा और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए।