बदायूं में आग का तांडव: दातागंज के 3 गांवों में 40 घर राख, उसहैत में 35 झोपड़ियां जलीं; लाखों का नुकसान
बदायूं: कुदरत का दोहरा प्रहार, पहले बाढ़ और अब आग ने छीनी छत
बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में मंगलवार का दिन ‘अग्नि परीक्षा’ जैसा रहा। तेज हवाओं के चलते जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आग ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि देखते ही देखते दर्जनों परिवार बेघर हो गए। सबसे ज्यादा तबाही दातागंज और उसहैत तहसील के कटरी इलाकों में देखने को मिली, जहां साबितगंज, प्रेमी नगला और जटा गांवों में करीब 40 से अधिक घर जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गए।
उसहैत: प्रेमी नगला और जटा में 35 झोपड़ियां राख
उसहैत थाना क्षेत्र के कटरी इलाके में दोपहर के वक्त जब अधिकांश ग्रामीण खेतों पर काम कर रहे थे, तभी अचानक आग की लपटें उठीं। तेज हवाओं ने आग को घी का काम किया और देखते ही देखते प्रेमी नगला गांव की 11 और पास के गांव जटा की 24 झोपड़ियां स्वाहा हो गईं।
- नुकसान: अनाज, नकदी, बिस्तर और घरेलू सामान पूरी तरह नष्ट हो गया।
- चुनौती: खेतों के बीच रास्ता न होने के कारण दमकल की गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं। ग्रामीणों ने निजी पंपिंग सेट और ट्यूबवेल के जरिए जान जोखिम में डालकर आग पर काबू पाया।
साबितगंज में 5 घर और पशुओं को भारी क्षति
दातागंज के साबितगंज गांव में रघुनाथ के घर से शुरू हुई आग ने आसपास के 5 पक्के-कच्चे मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। इस अग्निकांड में करीब 10 लाख रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। आग इतनी भीषण थी कि एक पालतू भैंस भी बुरी तरह झुलस गई।
सहसवान और बिसौली में भी मची अफरा-तफरी
- सहसवान: मुडारी सिधारपुर में हाईटेंशन लाइन के ढीले तारों से निकली चिंगारी ने एक किसान की एक बीघा गेहूं की फसल जलाकर राख कर दी।
- बिसौली: नवीन मंडी स्थल के पास डंप किए गए कूड़े में आग लगने से हड़कंप मच गया। पास ही डामर डिपो होने के कारण बड़ा खतरा पैदा हो गया था, जिसे दमकल विभाग ने समय रहते टाल दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम दातागंज और तहसीलदार राजस्व टीम के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचे।
”लेखपालों को नुकसान का सटीक आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़ितों की सूची तैयार कर ली गई है और उन्हें जल्द ही सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।” – प्रशासनिक अधिकारी
आग लगने पर क्या करें और कैसे बचें? (सुरक्षा टिप्स)
गर्मियों और तेज हवाओं के मौसम में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- खेतों में आग न लगाएं: फसल कटने के बाद बचे हुए अवशेष (नरई) को कभी न जलाएं।
- बिजली के तारों की सूचना: यदि आपके खेत या घर के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार ढीले हैं, तो तुरंत विभाग को सूचित करें।
- रसोई में सावधानी: खाना बनाने के बाद चूल्हे की आग को पानी डालकर पूरी तरह बुझा दें।
- भंडारण में सतर्कता: गेहूं और भूसे के ढेरों को आबादी और बिजली के खंभों से दूर रखें।
बाढ़ के बाद अब आग की मार
प्रभावित ग्रामीणों का दर्द छलकता देख हर कोई भावुक है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अभी पिछले साल आई बाढ़ की तबाही से उबर भी नहीं पाए थे कि अब आग ने उनका सब कुछ छीन लिया। वर्तमान में कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।