भदोही: अवैध क्लीनिक में ‘अनट्रेंड’ हाथों ने किया ऑपरेशन, प्रसूता की मौत; चौथी जान जाने के बाद जागी स्वास्थ्य विभाग की नींद
भदोही (उत्तर प्रदेश): स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखाते हुए भदोही जिले के औराई क्षेत्र में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के त्रिलोकपुर नहर स्थित ‘कान्हा पाली क्लीनिक’ में इलाज के नाम पर खिलवाड़ किया गया, जिसके चलते 25 वर्षीय प्रसूता चंद्रिका यादव की जान चली गई। हैरानी की बात यह है कि जिस अस्पताल में यह मौत हुई, वह पिछले एक साल में चार बार सील हो चुका है, लेकिन हर बार नाम बदलकर मौत का यह कारोबार फिर से शुरू हो जाता है।
क्या है पूरा मामला?
उपरौठ निवासी धर्मेंद्र यादव की पत्नी चंद्रिका यादव (25) को शुक्रवार शाम प्रसव पीड़ा होने पर कान्हा पाली क्लीनिक में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि क्लीनिक के कर्मचारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि प्रसव सामान्य (Normal Delivery) होगा। लेकिन रात करीब 11 बजे, परिजनों को बिना सूचित किए और बिना किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी के, ‘अनट्रेंड’ स्टाफ ने महिला का ऑपरेशन (C-Section) कर दिया।
ऑपरेशन के मात्र एक घंटे बाद ही जच्चा-बच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घर पहुँचते ही महिला की हालत बिगड़ने लगी। टांकों से अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) होने के कारण शनिवार सुबह चंद्रिका ने दम तोड़ दिया। जब परिजन उसे भदोही के एक निजी अस्पताल ले गए, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का हंगामा और फरार स्टाफ
महिला की मौत की खबर फैलते ही गुस्साए परिजनों ने क्लीनिक पर धावा बोल दिया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख क्लीनिक का पूरा स्टाफ मौके से फरार हो गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान टांके लगाने में घोर लापरवाही बरती गई, जो महिला की मौत का मुख्य कारण बनी। सूचना मिलने पर औराई कोतवाली पुलिस मौके पर पहुँची और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।
नाम बदलते रहे, लेकिन नहीं रुकीं मौतें
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस क्लीनिक का मालिक एक ही व्यक्ति है, जो हर बार कार्रवाई के बाद अस्पताल का नाम बदल देता है। इस स्थान पर पहले गुप्ता पाली क्लीनिक, फिर न्यू गुप्ता पाली क्लीनिक, उसके बाद धीरज पाली क्लीनिक और वर्तमान में कान्हा पाली क्लीनिक के नाम से अवैध संचालन किया जा रहा था।
पिछले एक साल का काला चिट्ठा:
- दिसंबर 2025: दीक्षितपुर की पम्मी पाल की लापरवाही के कारण मौत हुई। अस्पताल सील हुआ।
- अक्तूबर 2025: मिर्जापुर की एक महिला की मौत हुई। जिलाधिकारी के आदेश पर FIR दर्ज हुई और सील किया गया।
- ताजा मामला (अप्रैल 2026): चंद्रिका यादव की मौत।
अवैध अस्पतालों का मकड़जाल
त्रिलोकपुर नहर के आस-पास अवैध अस्पतालों का जाल फैला हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ करीब 6 से 7 ऐसे क्लीनिक हैं जहाँ विशेषज्ञों के बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन धरातल पर केवल अनट्रेंड झोलाछाप डॉक्टर ही ऑपरेशन तक कर डालते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ढिलमुल कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बार-बार सील होने के बाद ये अस्पताल दोबारा कैसे खुल जाते हैं?
प्रशासन की कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. एस.के. चक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएमओ डॉ. ए.के. मौर्य और डॉ. सूफिया की एक जांच टीम गठित की है। टीम को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल को पुनः सील किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
भदोही की यह घटना स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। एक गरीब परिवार ने अपनी बहू को खो दिया और एक नवजात के सिर से माँ का साया उठ गया। सवाल यह है कि क्या केवल ‘सील’ की कार्रवाई पर्याप्त है? जब तक इन अवैध संचालकों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक ‘नाम बदलकर’ मौत बांटने का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता।