कानपुर

कानपुर: लालइमली मिल के ऑडिट पर घमासान, कर्मचारियों के वेतन से कटे 70-70 हजार; 10 साल बाद शहर आएंगे BIC चेयरमैन

कानपुर की ऐतिहासिक लालइमली मिल एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह मिल की रौनक नहीं बल्कि कर्मचारियों के साथ हुआ कथित अन्याय और करोड़ों का घोटाला है। मिल के हालिया ऑडिट ने नए विवादों को जन्म दे दिया है, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। अब इस मामले को सुलझाने के लिए ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (BIC) के शीर्ष अधिकारियों के शहर आगमन की तैयारी चल रही है।

​1. ऑडिट में गड़बड़ी: मेडिकल खर्च बना ‘एडवांस’

​लालइमली मिल के कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले साल मई में हुई ऑडिट रिपोर्ट में भारी त्रुटियां हैं।

  • वेतन से कटौती: ऑडिट टीम ने कर्मचारियों को मिलने वाले नियमित मेडिकल खर्च को ‘एडवांस’ (अग्रिम भुगतान) की श्रेणी में डाल दिया।
  • भारी नुकसान: इस तकनीकी गलती की वजह से प्रत्येक कर्मचारी के वेतन से लगभग 60 से 70 हजार रुपये की कटौती कर ली गई है।
  • वेतन पर्ची का अभाव: कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले 81 महीनों की वेतन पर्ची (Salary Slip) तक नहीं दी गई है, जिससे वे अपनी कटौती का सही हिसाब भी नहीं देख पा रहे हैं।

​2. 52 लाख का वेतन घोटाला और अफसरों की चुप्पी

​करीब डेढ़ साल पहले लालइमली के कर्मचारियों के बकाये भुगतान के लिए 102 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था। जांच में सामने आया कि इस दौरान 52 लाख रुपये का घोटाला हुआ।

  • रिश्तेदारों को भुगतान: आरोप है कि चार अधिकारियों ने मिलकर सरकारी धन को मिल के कर्मचारियों के बजाय अपने करीबियों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।
  • एफआईआर पर सवाल: लालइमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार, विजिलेंस जांच और चार्जशीट के बावजूद अब तक दोषी अफसरों पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जो प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठाता है।

​3. 10 साल बाद BIC चेयरमैन का दौरा संभव

​लालइमली और धारीवाल मिलों की देखरेख करने वाली संस्था बीआईसी (BIC) के गलियारों में अब हलचल तेज है।

  • ओएसडी का आगमन: ऑडिट रिपोर्ट में विसंगतियों और कर्मचारियों की शिकायतों को सुनने के लिए जल्द ही बीआईसी के ओएसडी (OSD) कानपुर आ सकते हैं।
  • चेयरमैन की दस्तक: सबसे बड़ी खबर यह है कि लगभग एक दशक (10 साल) के लंबे अंतराल के बाद BIC के चेयरमैन के भी कानपुर आने की संभावना जताई गई है। इसके लिए विभाग को पत्र भी प्राप्त हो चुका है।

​4. वेतन संकट और कानूनी लड़ाई

​लालइमली के कर्मचारियों की मुश्किलें केवल कटौती तक सीमित नहीं हैं:

  • रुका हुआ वेतन: 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
  • बकाये की मांग: पीएफ (PF), ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और बोनस जैसे फंड्स के लिए कर्मचारी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • अगली सुनवाई: सहायक आयुक्त (केंद्रीय) ने प्रबंधन को जल्द भुगतान के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली महत्वपूर्ण वार्ता 18 मई 2026 को होनी तय है।

​5. लालइमली: एक गौरवशाली मिल का दुखद वर्तमान

​कभी ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहे जाने वाले कानपुर की पहचान रही लालइमली मिल आज भ्रष्टाचार और बदहाली का शिकार है। हजारों परिवारों का भविष्य इस मिल से जुड़ा है, जो अब पाई-पाई के लिए मोहताज हैं।

निष्कर्ष

​ऑडिट की विसंगतियां और वेतन घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि उन श्रमिकों के हक पर डाका है जिन्होंने दशकों तक इस मिल को सींचा है। अब सभी की निगाहें बीआईसी चेयरमैन के प्रस्तावित दौरे पर हैं, क्या वे इस ऐतिहासिक मिल और इसके कर्मचारियों के भाग्य का फैसला बदल पाएंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *