लखनऊ

​Noida Burning: नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग ने लिया हिंसक रूप; 300 कंपनियों में तोड़फोड़, 20 वाहन फूंके, भारी बवाल के बाद सरकार ने बढ़ाई मजदूरी

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा (गौतमबुद्धनगर) के लिए सोमवार का दिन किसी बुरे सपने जैसा रहा। पिछले चार दिनों से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सुलग रहा श्रमिकों का असंतोष सोमवार सुबह एक भीषण ज्वाला में बदल गया। महज दो घंटों के भीतर हिंसा की आग पूरे शहर में फैल गई, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

कैसे शुरू हुआ बवाल?

​घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार सुबह करीब 9 बजे फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी से हुई। यहाँ वेतन वृद्धि की मांग कर रहे श्रमिकों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। देखते ही देखते आक्रोशित कामगारों की भीड़ सड़कों पर उतर आई और सेक्टर-58, 59, 62, 63 और सेक्टर-84 जैसे औद्योगिक इलाकों की ओर कूच कर दिया। प्रदर्शनकारी एक जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ रहे थे और रास्ते में आने वाली कंपनियों के शीशे तोड़ते जा रहे थे।

7:30 घंटे तक रहा उपद्रव का तांडव

​नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में करीब साढ़े सात घंटे तक अराजकता का माहौल बना रहा। उपद्रवियों ने न केवल कंपनियों की खिड़कियां और फर्नीचर तोड़े, बल्कि कई फैक्ट्रियों के अंदर घुसकर मशीनरी को भी नुकसान पहुँचाया।

  • आगजनी और तोड़फोड़: सेक्टर-63 स्थित मारुति कार के सर्विस सेंटर में भीड़ ने कई नई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और शोरूम में जमकर तोड़फोड़ की।
  • वाहन हुए खाक: इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक निजी और व्यावसायिक वाहनों में तोड़फोड़ की गई, जबकि 20 से अधिक वाहनों को आग लगा दी गई। पुलिस की गाड़ियां भी उपद्रवियों के निशाने पर रहीं।

पुलिस कार्रवाई और घायल

​हालात पर काबू पाने के लिए नोएडा पुलिस और पीएसी (PAC) बल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने कई स्थानों पर उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस झड़प में 10 पुलिसकर्मियों सहित 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। बड़ी संख्या में महिला श्रमिक भी सड़कों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करती नजर आईं।

सरकार का बड़ा फैसला: रातों-रात बढ़ी मजदूरी

​शहर में बढ़ते तनाव और हिंसा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार देर रात एक बड़ा और तात्कालिक फैसला लिया। सरकार ने प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी दरों (Minimum Wage Rates) में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है।

  • नई दरें: नया आदेश 1 अप्रैल 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा।
  • इजाफा: अलग-अलग श्रेणियों के श्रमिकों के वेतन में अधिकतम 3000 रुपये तक की वृद्धि की गई है।
  • स्थायी समाधान: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक तात्कालिक कदम है। भविष्य में वेज बोर्ड के माध्यम से वेतन की व्यापक समीक्षा कर स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

उद्योग जगत में दहशत का माहौल

​नोएडा आंत्रप्रिन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने इस घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, इस हिंसा में 300 से अधिक कंपनियों को भारी वित्तीय और ढांचागत नुकसान पहुँचा है। कई निवेशकों और उद्यमियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।

निष्कर्ष

​नोएडा की यह घटना औद्योगिक संबंधों में बढ़ते तनाव और संवाद की कमी का परिणाम है। हालांकि सरकार ने वेतन बढ़ाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन जिस तरह से करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया, उसने शहर की ‘बिजनेस फ्रेंडली’ छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है। प्रशासन अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है।

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