लखनऊ

Suna Hai Kya: यूपी ब्यूरोक्रेसी में ‘लिस्ट’ की बेचैनी और साहब के ‘पुराने चर्चे’; लखनऊ के गलियारों से निकली 3 दिलचस्प कहानियां

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ। यहाँ की आबोहवा में केवल तहजीब ही नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों की ‘कानाफूसी’ भी घुली रहती है। चाहे प्रशासन के बंद कमरे हों या सचिवालय की कैंटीन, कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो फाइलों से बाहर निकलकर चर्चा का विषय बन ही जाते हैं। अमर उजाला की विशेष सीरीज “सुना है क्या” के इस अंक में हम आपके लिए लेकर आए हैं यूपी की नौकरशाही और राजनीति के तीन ऐसे किस्से, जो इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं।

1. पुरानी जगह से नई जिम्मेदारी: साहब को है वापसी का यकीन

​पहला किस्सा एक ऐसे कद्दावर नौकरशाह का है, जिनका हाल ही में तबादला हुआ है। सरकार ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन चर्चा यह है कि साहब अपनी ‘पुरानी कुर्सी’ छोड़ने को तैयार ही नहीं हैं। वे अपनी नई जिम्मेदारी का निर्वहन भी पुरानी जगह (ऑफिस) से ही कर रहे हैं।

वजह क्या है? सूत्रों की मानें तो साहब को पूरा यकीन है कि उनकी जिम्मेदारी फिर से बदली जाएगी और वे वापस अपनी पुरानी प्रभावशाली स्थिति में लौट आएंगे। इसी उम्मीद में वे पुरानी जगह से हिलने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि, इस जिद की शिकायतें अब आलाकमान तक पहुँच चुकी हैं। कहा जा रहा है कि साहब फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में हैं और केवल बहुत ही महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

2. बेचैनी लिस्ट की: पसीने से तर-बतर हो रही ब्यूरोक्रेसी

​इन दिनों यूपी की ब्यूरोक्रेसी में एक ‘लिस्ट’ को लेकर जबरदस्त बेचैनी है। यह लिस्ट है—आगामी तबादलों की। चर्चाओं का बाजार इतना गर्म है कि दिग्गजों के नाम हवा में तैर रहे हैं।

  • कद की लड़ाई: कुछ कद्दावर अफसर इस बात को लेकर परेशान हैं कि उन्हें उनके रसूख के हिसाब से नई पोस्टिंग मिलेगी या नहीं।
  • परिक्रमा जारी: वहीं, वे अफसर जो लंबे समय से ‘हाशिये’ (Side Posting) पर बैठे हैं, वे अब किसी भी तरह एक छोटा और ‘कमजोर’ जिला पाने के लिए भी जद्दोजहद कर रहे हैं।
  • पंचम तल के चक्कर: खबर है कि करीब चार ऐसे बड़े अधिकारी हैं जो अपनी पोस्टिंग के लिए ‘पहले तल’ से लेकर ‘पंचम तल’ (मुख्यमंत्री कार्यालय) तक की परिक्रमा कर रहे हैं। सचिवालय की सीढ़ियां इन अधिकारियों के पसीने की गवाह बन रही हैं।

3. साहब के पुराने चर्चे नए हुए: 72 घंटे में ‘शंट’ और पुरानी खुन्नस

​तीसरा किस्सा पुलिस विभाग से जुड़ा है। प्रदेश में हाल ही में हुए बड़े फेरबदल के बाद एक अधिकारी को पूर्वांचल के एक महत्वपूर्ण जिले की कमान सौंपी गई। साहब ने कुर्सी संभालते ही अपना ‘रौब’ दिखाना शुरू किया और महज 72 घंटे के भीतर ही कई कोतवाल और दरोगाओं को किनारे (Shunt) कर दिया।

​लेकिन, साहब की यह सख्ती उन्हीं पर भारी पड़ती दिख रही है। जिले के ‘फित्ती वाले’ (सिपाही) से लेकर ‘गोल्डन स्टार’ (इंस्पेक्टर) तक, सभी साहब का पुराना इतिहास खंगालने में जुट गए हैं। अब चर्चा यह हो रही है कि जब साहब ‘अवध’ के एक जिले में तैनात थे, तब एक हेड कांस्टेबल के साथ उनका बड़ा विवाद हुआ था। इस विवाद की जड़ एक फाइव स्टार होटल की पार्टी थी, जो किसी वजह से नहीं हो पाई थी। अब साहब के वे पुराने ‘किस्से’ नए जिले की पुलिस लाइन्स और थानों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

निष्कर्ष: चर्चाओं का अंत नहीं

​यूपी की राजनीति और प्रशासन में यह कानाफूसी कोई नई बात नहीं है। यहाँ हर तबादले के पीछे एक कहानी होती है और हर आदेश के पीछे एक नया समीकरण। ‘सुना है क्या’ के ये किस्से बताते हैं कि सरकारी फाइलों के सूखे पन्नों के पीछे इंसानी महत्वाकांक्षाओं, ईर्ष्या और पावर गेम की एक अलग ही दुनिया बसती है।

​अधिकारी चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, पर सत्ता के गलियारों की ये बातें दीवारों से छनकर बाहर आ ही जाती हैं। अब देखना यह है कि ‘लिस्ट की बेचैनी’ किसे सुकून देती है और किसे हाशिये पर बनाए रखती है।

पाठकों के लिए विशेष (Highlights)

  • नौकरशाह की जिद: नई जिम्मेदारी के बावजूद पुरानी कुर्सी का मोह।
  • तबादलों का डर: कद्दावर अफसरों से लेकर हाशिये पर बैठे अफसरों तक में खलबली।
  • पुरानी यादें: पूर्वांचल के नए कप्तान के पुराने विवादों ने पकड़ा तूल

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