कानपुर

संजय कपूर संपत्ति विवाद: ‘महाभारत भी छोटी लगेगी’, मां रानी कपूर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 14 को सुनवाई

नई दिल्ली/कानपुर: दिवंगत व्यवसायी संजय कपूर के परिवार में चल रहा संपत्ति का झगड़ा अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर है। इस विवाद की जटिलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि इसके सामने ‘महाभारत’ भी छोटी लगेगी। संजय कपूर की 80 वर्षीय मां, रानी कपूर ने अपनी बहू प्रिया सचदेव कपूर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 14 मई को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।
​क्या है ताज़ा विवाद?
​यह कानूनी लड़ाई तब और तेज हो गई जब रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर हस्तक्षेप की मांग की। रानी कपूर का आरोप है कि संजय कपूर की तीसरी पत्नी, प्रिया सचदेव कपूर और कुछ अन्य लोग पारिवारिक ट्रस्ट के कामकाज में बाधा डाल रहे हैं।
​रानी कपूर की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
​ट्रस्ट के हस्तक्षेप पर रोक: जब तक 7 मई को कोर्ट द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रिया सचदेव को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के मामलों में दखल देने से रोका जाए।
​बोर्ड मीटिंग पर स्टे: रानी कपूर ने 18 मई को होने वाली कंपनी की ‘बोर्ड मीटिंग’ पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई है। यह मीटिंग ‘रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा बुलाई गई है, जिसके पास परिवार की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा है।
​कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “महाभारत भी छोटा लगेगा”
​मंगलवार को जब रानी कपूर के वकील ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस याचिका का जिक्र किया, तो कोर्ट ने मामले की गंभीरता और पारिवारिक कलह पर गहरी चिंता जताई।
​वकील ने दलील दी कि 18 मई की मीटिंग का मुख्य एजेंडा बोर्ड में ‘अतिरिक्त निदेशकों’ की नियुक्ति करना है, जो कि पूरी तरह से गलत मंशा से किया जा रहा है। इस पर टिप्पणी करते हुए जज ने कहा:
​”हम एक ऐसे अखाड़े में उतर आए हैं, जिसके सामने महाभारत भी बहुत छोटा लगेगा। हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं और इसे विस्तार से देखेंगे।”
​अदालत ने अब इस मामले को 14 मई, गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
​विवाद की जड़ में क्या है?
​संजय कपूर के निधन के बाद उनकी विशाल संपत्ति को लेकर परिवार दो धड़ों में बंट गया है। एक तरफ उनकी मां रानी कपूर हैं, जो पारिवारिक विरासत और ट्रस्ट की रक्षा का हवाला दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर हैं। विवाद का मुख्य केंद्र ‘रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ का नियंत्रण है।
​रानी कपूर का कहना है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया चलने के दौरान बोर्ड में नए निदेशकों की नियुक्ति करना या ट्रस्ट के फैसलों को प्रभावित करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है।
​निष्कर्ष और आगामी सुनवाई
​14 मई की सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। क्या सुप्रीम कोर्ट बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाएगा? या फिर मध्यस्थता के जरिए इस ‘आधुनिक महाभारत’ को सुलझाने का कोई नया रास्ता निकाला जाएगा? पूरे देश की नजरें अब शीर्ष अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।

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