यूपी में गर्मी से पहले ‘बिजली का संकट’? 15 दिनों में 2000 मेगावाट बढ़ी मांग; हैरान कर देगी यह वजह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस बार गर्मी के मौसम ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन बिजली विभाग के माथे पर पसीना आने लगा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस बार बिजली की खपत बढ़ने का कारण केवल बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि सात समंदर पार चल रहा हथियारबंद संघर्ष है। बीते 15 दिनों के भीतर प्रदेश में बिजली की मांग में लगभग 2000 मेगावाट का भारी इजाफा दर्ज किया गया है।
युद्ध, गैस संकट और बिजली का कनेक्शन
आमतौर पर मार्च के महीने में बिजली की खपत पंखों और एयर कंडीशनर के चलने से बढ़ती है, लेकिन इस साल कहानी कुछ और है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर एलपीजी (गैसे) की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। उत्तर प्रदेश में भी गैस सिलेंडरों की किल्लत महसूस की जा रही है।
नतीजतन, प्रदेश की जनता ने भोजन पकाने के लिए एलपीजी के विकल्प के रूप में बिजली से चलने वाले उपकरणों, जैसे इंडक्शन कुकटॉप और हीटर, का रुख कर लिया है। यूपी पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों का मानना है कि घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा गैस के बजाय बिजली उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल ने लोड को अचानक बढ़ा दिया है।
आंकड़ों की जुबानी: खपत का ग्राफ
प्रदेश में बिजली की मांग का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर चढ़ा है:
- 1 मार्च: अधिकतम मांग 19,190 मेगावाट थी।
- 10 मार्च: यह बढ़कर 21,675 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
- वर्तमान स्थिति: हालांकि पिछले कुछ दिनों से मौसम में थोड़ी नमी है, फिर भी मांग 21,000 मेगावाट के आसपास बनी हुई है।
ऊर्जा विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य मौसम में इस समय खपत 18,000 से 19,000 मेगावाट के बीच होनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान स्थिति ने रणनीतिकारों को नई योजना बनाने पर मजबूर कर दिया है।
बाजार में इंडक्शन की ‘जबरदस्त’ सेल
बिजली की खपत बढ़ने का सीधा प्रमाण इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में देखने को मिल रहा है। लखनऊ के प्रमुख बाजारों जैसे नाका और गोमती नगर में इंडक्शन चूल्हों की मांग कई गुना बढ़ गई है। थोक विक्रेताओं का कहना है कि जहां पहले दिन भर में 10 से 15 इंडक्शन बिकते थे, अब यह आंकड़ा 50 के पार जा चुका है। लोग न केवल इंडक्शन बल्कि इमर्शन रॉड और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग अप्लायंसेज भी धड़ल्ले से खरीद रहे हैं।
विभाग की तैयारी: क्या होगी कटौती?
बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं के मन में बिजली कटौती का डर है। हालांकि, यूपी पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा:
”उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली दी जा रही है। सभी डिस्कॉम (विद्युत वितरण कंपनियां) 32,000 मेगावाट तक की आपूर्ति का लक्ष्य रखकर काम कर रहे हैं, ताकि आने वाले महीनों में मांग बढ़ने पर भी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।”
वर्तमान में विभाग शहरी फीडरों की विशेष निगरानी कर रहा है, क्योंकि सुबह और शाम के समय (8 से 10 बजे) जब घरों में खाना पकता है, तब लोड अपने चरम (Peak) पर होता है।