UP Education Crisis: 872 छात्र और सिर्फ 2 शिक्षक; लखीमपुर के इस राजकीय कॉलेज में ‘पत्राचार’ जैसी हो गई पढ़ाई
लखीमपुर खीरी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ रायबरेली और सीतापुर जैसे जिलों के राजकीय कॉलेजों में छात्रों की कमी है, वहीं लखीमपुर खीरी के श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय, पलिया कला में छात्र तो पर्याप्त हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। 25 साल पुराने इस कॉलेज में वर्तमान में 872 छात्र नामांकित हैं, जिन्हें संभालने की जिम्मेदारी महज दो शिक्षकों के कंधों पर है।
एक शिक्षक, कई विषय: मजबूरी में बन रहे ‘ऑलराउंडर’
कॉलेज की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ के प्राचार्य डॉ. सूर्य प्रकाश शुक्ला खुद संस्कृत के शिक्षक हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण वे छात्रों को हिंदी, भूगोल और समाजशास्त्र की सामान्य जानकारी भी देने को मजबूर हैं।
वहीं, बीकॉम के छात्रों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वसीम खान अकेले मोर्चा संभाले हुए हैं। बाकी विषयों के लिए छात्र या तो कोचिंग का सहारा ले रहे हैं या फिर खुद ही जैसे-तैसे कोर्स पूरा कर रहे हैं।
4000 से घटकर 872 रह गई छात्रों की संख्या
डॉ. शुक्ला के अनुसार, यह कॉलेज का 25वां वर्ष है। साल 2020-21 में जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब यहाँ करीब 4000 छात्र थे। शिक्षकों के लगातार तबादलों और नई नियुक्तियां न होने के कारण यह संख्या घटकर अब 872 रह गई है। नियमित कक्षाएं न चलने के कारण कॉलेज में छात्रों की उपस्थिति भी अब 250-300 तक ही सिमट गई है।
संसाधन हैं पर शिक्षक नहीं
हैरानी की बात यह है कि कॉलेज बुनियादी सुविधाओं के मामले में पिछड़ा नहीं है। यहाँ:
- 14 क्लास रूम और लाइब्रेरी उपलब्ध है।
- कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास और वाई-फाई की सुविधा है।
- वाटर कूलर जैसे संसाधन भी मौजूद हैं।
बावजूद इसके, कॉलेज का ग्रामीण इलाके में होना और खस्ताहाल सड़कें शिक्षकों के यहाँ न रुकने का बड़ा कारण बनी हुई हैं।
छात्रों का दर्द: “पत्राचार जैसी हो रही पढ़ाई”
बीए प्रथम वर्ष के छात्र अमन कुमार का कहना है कि शिक्षकों की कमी से उनका भविष्य अंधकार में है। प्रोफेशनल ट्यूटर न मिलने और कॉलेज में पर्याप्त जानकारी न मिल पाने के कारण पढ़ाई का स्तर केवल पत्राचार (Correspondence) जैसा रह गया है।
क्या कहती है सरकार?
मामला सुर्खियों में आने के बाद उच्च शिक्षा निदेशक बीएल शर्मा ने संज्ञान लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इसी सप्ताह कॉलेज में अन्य शिक्षकों को संबद्ध (Attach) किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन कॉलेजों में छात्रों की संख्या अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
निष्कर्ष: उपेक्षा का शिकार होता सीमावर्ती क्षेत्र
नेपाल सीमा के नजदीक स्थित पलिया कला का यह एकमात्र राजकीय कॉलेज विभाग की उपेक्षा के कारण अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। यदि समय रहते शिक्षकों की स्थाई नियुक्ति नहीं की गई, तो यह संस्थान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।