वाराणसी में नाविकों के दो गुटों में खूनी संघर्ष: तेलियानाला घाट पर सवारी बैठाने को लेकर पथराव, इलाके में दहशत
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी के घाट एक बार फिर हिंसा के गवाह बने हैं। शुक्रवार की शाम आदमपुर थाना क्षेत्र के तेलियानाला घाट पर नाव में सवारी बैठाने के मामूली विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि देखते ही देखते पूरा इलाका युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। नाविकों के दो गुटों के बीच जमकर लात-घूंसे चले और बाद में दोनों ओर से भारी पथराव शुरू हो गया। इस घटना से घाट पर मौजूद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच गई।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत तेलियानाला घाट पर नाव में पर्यटकों को बैठाने को लेकर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शाम के समय जब घाटों पर आरती की तैयारी और पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही थी, तभी दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडे लेकर आमने-सामने आ गए। इसके बाद तेलियानाला-सक्काघाट मार्ग पर करीब आधे घंटे तक अराजकता का माहौल बना रहा और दोनों ओर से जमकर पत्थरबाजी हुई।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही आदमपुर थाना प्रभारी विमल मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखते ही उपद्रवी वहां से भाग खड़े हुए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और घायलों को उपचार के लिए भेजा। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों की ओर से थाने में तहरीर (शिकायत) दी गई है। पुलिस अब घाट के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हिंसा भड़काने वाले मुख्य आरोपियों की पहचान की जा सके।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
- प्रथम पक्ष: संगीता देवी (पत्नी संतोष साहनी) ने आरोप लगाया कि उनके परिवार के राजकुमार साहनी, छोटू और अन्य लोग जब नाव पर सवारी बैठा रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के सिजय साहनी, गोपी और अजय साहनी ने आकर मारपीट शुरू कर दी और उनके पक्ष पर पथराव किया।
- द्वितीय पक्ष: वहीं, गोपी साहनी का कहना है कि राजकुमार साहनी और उनके सहयोगी घाट पर एकाधिकार जमाना चाहते हैं। वे दूसरे नाविकों को न तो नाव लगाने देते हैं और न ही सवारी बैठाने देते हैं। इसी दबंगई का विरोध करने पर विवाद हुआ।
पुराना है विवादों का इतिहास
तेलियानाला और सक्काघाट पर नाविकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई कोई नई बात नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ नाव बांधने और सवारी बैठाने को लेकर अक्सर मारपीट होती रहती है। बताया जा रहा है कि एक पक्ष की 25 से अधिक नावें यहाँ संचालित होती हैं, जिसके कारण वे अन्य छोटे नाविकों को वहां काम नहीं करने देते। बार-बार होने वाली इन घटनाओं से वाराणसी की छवि पर भी बुरा असर पड़ रहा है, क्योंकि यहाँ देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।
पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल
काशी के घाट अपनी शांति और दिव्यता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन नाविकों के बीच बार-बार होने वाले इन झगड़ों ने पर्यटकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पत्थरबाजी के दौरान कई पर्यटक बाल-बाल बचे। स्थानीय प्रशासन के लिए यह चुनौती बन गया है कि कैसे इन घाटों पर ‘नाविक माफिया’ और आपसी गुटबाजी को खत्म कर एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
निष्कर्ष
फिलहाल आदमपुर पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर विमल मिश्रा ने सख्त लहजे में कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और अराजक तत्वों पर नजर रखी जा रही है।