बीएचयू में डॉक्टरों को पीटा: मुंह बांधकर पहुंचे युवकों ने की मारपीट, तीन घंटे बंद रही गैस्ट्रोलॉजी की ओपीडी
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गैस्ट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में कुछ नकाबपोश युवकों ने डॉक्टरों पर हमला कर दिया। इस घटना के विरोध में डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर दिया, जिससे करीब तीन घंटे तक ओपीडी सेवाएं ठप रहीं और दूर-दराज से आए सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा।
घटना का विवरण: मरीज को पहले दिखाने का दबाव
जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार दोपहर करीब 1:00 बजे की है। सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक (SSB) के भूतल पर स्थित गैस्ट्रोलॉजी ओपीडी में विभागाध्यक्ष डॉ. देवेश प्रकाश यादव और अन्य रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान 5-6 की संख्या में युवक, जिन्होंने अपने मुंह बांध रखे थे, ओपीडी में घुस आए।
आरोप है कि इन युवकों ने कतार में लगे अन्य मरीजों को दरकिनार कर अपने एक परिचित मरीज को पहले दिखाने का दबाव बनाया। जब ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उनसे ओपीडी नंबर और प्रक्रिया के बारे में पूछा, तो युवक भड़क गए और डॉक्टरों के साथ गाली-गलौज व मारपीट शुरू कर दी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जिस समय यह हमला हुआ, ओपीडी में भारी भीड़ मौजूद थी। मारपीट शुरू होते ही तीमारदारों और मरीजों के बीच भगदड़ मच गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहे। डॉक्टरों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने हमलावरों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की।
विरोध में बंद रही ओपीडी, 200 मरीज लौटे निराश
डॉक्टरों के साथ हुई इस बदसलूकी से नाराज होकर विभागाध्यक्ष डॉ. देवेश प्रकाश यादव समेत सभी रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी का काम छोड़ दिया। सुरक्षा की मांग को लेकर डॉक्टर ओपीडी से बाहर निकल गए।
तीन घंटे तक सेवाएं ठप: दोपहर 1 बजे से करीब 4 बजे तक ओपीडी पूरी तरह बंद रही।
मरीजों की परेशानी: इस दौरान करीब 200 मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए ही वापस लौट गए। कई मरीज बिहार और पूर्वांचल के दूरदराज के जिलों से इलाज की उम्मीद में आए थे।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुँचे। डॉक्टरों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और अस्पताल परिसर में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर नकाबपोश युवकों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में डॉक्टरों के साथ इस तरह की मारपीट सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक को दर्शाती है। जहां एक ओर डॉक्टरों की सुरक्षा दांव पर है, वहीं दूसरी ओर निर्दोष मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।