दवा निर्माण के लिए अब पूरे देश में ‘एक देश, एक नियम’: बिना पूर्ण डोजियर नहीं मिलेगा लाइसेंस
भारत सरकार ने देश की दवा निर्माण प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब देश के किसी भी राज्य में दवा बनाने का लाइसेंस लेने के लिए अलग-अलग मानक नहीं होंगे। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने आदेश जारी किया है कि अब कंपनियों को दवा उत्पादन का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए एक विस्तृत ‘डोजियर’ जमा करना अनिवार्य होगा।
क्यों पड़ी इस नए नियम की जरूरत?
अब तक भारत के विभिन्न राज्यों में दवा लाइसेंस देने की प्रक्रिया और मानक अलग-अलग थे। इस भिन्नता के कारण अक्सर दवाओं की गुणवत्ता (Quality) पर सवाल उठते थे। हाल के वर्षों में कुछ राज्यों में निर्मित कफ सिरप और अन्य दवाओं के कारण हुई अप्रिय घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फार्मा उद्योग की छवि को प्रभावित किया था।
पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में घटिया कफ सिरप के कारण बच्चों की मौत का मामला सामने आया था, जिसमें नियमों के उल्लंघन और राज्य स्तरीय विभागों द्वारा ढिलाई बरतने की बात उजागर हुई थी। इन्ही खामियों को दूर करने के लिए अब ‘डोजियर आधारित प्रणाली’ (Dossier-based System) लागू की जा रही है।
क्या है डोजियर आधारित प्रणाली?
नया नियम लागू होने के बाद, किसी भी फार्मा कंपनी को दवा निर्माण का लाइसेंस चाहिए तो उसे एक व्यापक तकनीकी दस्तावेज (Dossier) देना होगा। इसमें निम्नलिखित जानकारियां शामिल होंगी:
- दवा की जांच रिपोर्ट: दवा के क्लिनिकल और लैब परीक्षण के परिणाम।
- सुरक्षा और प्रभाव: दवा मानव शरीर पर कितनी सुरक्षित और असरदार है, इसका पूरा डेटा।
- उत्पादन प्रक्रिया: दवा बनाने की विधि और इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की जानकारी।
- क्वालिटी कंट्रोल: गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कंपनी द्वारा अपनाए जाने वाले मानक।
उत्तर प्रदेश एफडीए (UP FDA) सहित सभी राज्यों को इस संबंध में 9 पन्नों का मार्गदर्शक दस्तावेज (Guidance Document) भेजा गया है। स्थानीय औषधि नियंत्रक विभाग इस डोजियर का गहन निरीक्षण करेगा और संतुष्ट होने पर ही लाइसेंस की सिफारिश करेगा।
प्रमुख बदलाव और उनके प्रभाव
| क्षेत्र | पुराना सिस्टम | नया डोजियर सिस्टम |
|---|---|---|
| मानक | राज्यवार अलग-अलग (Varied Standards) | पूरे देश में एक समान (Uniform Standards) |
| जवाबदेही | स्थानीय स्तर पर कम पारदर्शिता | अलीगढ़ से दिल्ली तक कड़ी निगरानी |
| दस्तावेज | बुनियादी कागजी कार्रवाई | विस्तृत तकनीकी डोजियर अनिवार्य |
| पारदर्शिता | मध्यम | उच्च (High Transparency) |
किन्हें मिलेगी छूट?
यह नया सख्त नियम केवल एलोपैथिक दवाओं के उत्पादन पर केंद्रित है। फिलहाल, निम्नलिखित क्षेत्रों को इस आदेश के दायरे से बाहर रखा गया है:
- आयुष दवाएं (Ayurvedic, Unani, Siddha, Homeopathy)
- सौंदर्य प्रसाधन (Cosmetics)
- चिकित्सा उपकरण (Medical Devices)
निष्कर्ष: उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित भविष्य
जिला औषधि नियंत्रक विभागों के अनुसार, इस व्यवस्था से मानक से कम गुणवत्ता वाली (NSQ) दवाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। यदि किसी कंपनी की जानकारी अधूरी पाई जाती है, तो उसका आवेदन तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। इससे न केवल घरेलू बाजार में दवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ‘Pharmacy of the World’ के रूप में भारत का विश्वास और मजबूत होगा।
अब स्थानीय दवा कंपनियों को अपने बुनियादी ढांचे और दस्तावेजीकरण में सुधार करना होगा, जिसमें औषधि विभाग उनकी सहायता भी करेगा।