किसानों की बढ़ेगी आमदनी: अब 3 रुपये किलो हरा चारा खरीदेगी सरकार, बीज के लिए भी मिलेगी नकद सहायता
मथुरा। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मथुरा जिले में गोशालाओं की स्थिति को बेहतर बनाने और आवारा पशुओं के चारे की समस्या को हल करने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत अब सरकार सीधे किसानों से 3 रुपये प्रति किलो की दर से हरा चारा खरीदेगी। इतना ही नहीं, चारे की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को बीज और उसके लिए आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराएगी।
किसानों और गोशालाओं के बीच होगा अनुबंध
गो सेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने हाल ही में एक प्रेसवार्ता के दौरान इस योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य गोशालाओं में चारे की कमी को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके लिए ‘कान्हा गोशाला’ और ‘वृहद गोशाला’ के आसपास रहने वाले किसानों के साथ विशेष अनुबंध (Contract) किया जाएगा।
इस अनुबंध के तहत किसानों को अपने खेतों में हरा चारा उगाना होगा, जिसे सरकार एक निश्चित मूल्य पर खरीदेगी। इससे किसानों को अपनी फसल के लिए बाजार ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें घर बैठे ही एक निश्चित आय प्राप्त होगी।
नेपियर घास पर विशेष जोर और आर्थिक मदद
सरकार इस योजना में विशेष रूप से नेपियर घास (Napier Grass) की खेती को बढ़ावा दे रही है। नेपियर घास अपनी अधिक पैदावार और पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। योजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- मुफ्त बीज: सरकार अनुबंध करने वाले किसानों को उन्नत किस्म के नेपियर घास के बीज उपलब्ध कराएगी।
- नकद सहायता: बीज बोने और उसकी देखरेख के लिए किसानों को अलग से धनराशि भी दी जाएगी।
- निश्चित बाजार: पैदावार तैयार होते ही सरकार 3 रुपये प्रति किलो के भाव से उसे खरीदेगी।
युवाओं और समाजसेवियों को मिलेगा रोजगार
सरकार केवल चारे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गोशालाओं के प्रबंधन में भी बड़े बदलाव कर रही है। अब गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों को सौंपी जाएगी। इससे न केवल गोशालाओं की व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि सरकार ने सभी गोशालाओं के लिए पर्याप्त बजट और धनराशि पहले ही आवंटित कर दी है।
बरारी गोशाला का निरीक्षण और एसआईटी जांच
प्रेसवार्ता के दौरान रमाकांत उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने बरारी स्थित गोशाला का औचक निरीक्षण किया और वहां गंदगी मिलने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सफाई के निर्देश दिए। वहीं, क्षेत्र में चर्चित ‘फरसा वाले बाबा’ की मृत्यु के मामले पर उन्होंने कहा कि एसआईटी (SIT) इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: एक साथ सधेंगे दो निशाने
सरकार की यह पहल एक साथ दो बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में है। पहला, गोवंश को साल भर पौष्टिक और हरा चारा मिलेगा जिससे उनकी सेहत में सुधार होगा। दूसरा, किसानों को परंपरागत खेती के अलावा चारे की खेती से अच्छी कमाई का जरिया मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल मथुरा में सफल रहता है, तो इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जा सकता है।